सोशल संवाद/डेस्क: ईरान पर अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई के बाद स्ट्रेट ऑफ Hormuz में बढ़े तनाव के बीच दुनिया भर में तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। इस बीच भारत ने अपनी ऊर्जा नीति को लेकर स्पष्ट रुख अपनाया है। केंद्र सरकार ने कहा है कि देश को जहां भी सस्ता तेल मिलेगा, भारत वहीं से खरीदारी करेगा।
यह भी पढ़ें: Andhra Pradesh में नई जनसंख्या नीति, तीसरे बच्चे पर आर्थिक प्रोत्साहन और विशेष सुविधाओं का ऐलान
सरकार ने यह भी भरोसा दिलाया कि वैश्विक तनाव के बावजूद भारत की ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित और स्थिर बनी हुई है। केंद्र के अनुसार, भारत ने अपने कच्चे तेल के स्रोतों को बढ़ाकर अब 40 देशों तक कर दिया है, जिससे सप्लाई चेन मजबूत हुई है और किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम हुई है।
सरकार ने यह भी पुष्टि की कि अमेरिका से मिली अस्थायी छूट के बाद भारत रूस से तेल आयात जारी रखेगा। केंद्र ने साफ कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के फैसले किसी अन्य देश की अनुमति पर निर्भर होकर नहीं लेता।आंकड़ों के मुताबिक भारत के पास रिजर्व और सप्लाई चेन में 250 मिलियन बैरल से अधिक कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद मौजूद हैं, जो करीब सात से आठ हफ्ते की खपत के बराबर है।
केंद्र सरकार का कहना है कि वैश्विक हालात चाहे जैसे हों, देश की ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए भारत अपने हित में सबसे किफायती और स्थिर स्रोतों से तेल खरीदता रहेगा।









