सोशल संवाद / डेस्क : भारतीय नौसेना की समुद्री क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को भारतीय नौसेना के लिए तैयार किए गए पहले फ्लीट सपोर्ट शिप (FSS)-1 ‘सूर्या’ का जलावतरण किया। इस जहाज के नौसेना में शामिल होने से समुद्र में लंबे समय तक अभियानों को जारी रखने और नौसेना की परिचालन क्षमता को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
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इस मौके पर हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL) में कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का भी उद्घाटन और शुभारंभ किया गया। इनमें नया उन्नत स्लिपवे और 300 टन क्षमता वाला गोलियथ क्रेन शामिल है। इसके अलावा एक अन्य फ्लीट सपोर्ट शिप के निर्माण के लिए कील रखने की प्रक्रिया भी पूरी की गई।
एक ही कार्यक्रम में तीन बड़ी उपलब्धियां
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि एक ही स्थान पर तीनों उपलब्धियां भारत की बढ़ती समुद्री ताकत और जहाज निर्माण क्षमता को दर्शाती हैं।
उन्होंने कहा कि जहाज का जलावतरण देश की उपलब्धि, नए जहाज की कील रखना भविष्य के संकल्प और नए स्लिपवे का उद्घाटन बढ़ती जहाज निर्माण क्षमता का प्रतीक है। उनके अनुसार, हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड में अब केवल जहाजों का निर्माण नहीं हो रहा, बल्कि देश की समुद्री शक्ति के भविष्य को मजबूत करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
‘सूर्या’ से नौसेना की परिचालन क्षमता को मिलेगा बल
फ्लीट सपोर्ट शिप का इस्तेमाल नौसेना के जहाजों को समुद्र में आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के लिए किया जाता है। ऐसे जहाज लंबे समुद्री अभियानों के दौरान नौसेना की परिचालन क्षमता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
रक्षा मंत्री ने कहा कि ‘सूर्या’ का जलावतरण भारतीय नौसेना की समुद्र में पहुंच, लंबे समय तक सक्रिय रहने की क्षमता और अभियान प्रभावशीलता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
HSL को मिला नया बुनियादी ढांचा
कार्यक्रम के दौरान हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड में नए उन्नत स्लिपवे और 300 टन क्षमता वाले गोलियथ क्रेन का उद्घाटन किया गया। आधुनिक सुविधाओं से शिपयार्ड की जहाज निर्माण क्षमता को बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
राजनाथ सिंह ने हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड को भारत की राष्ट्रीय समुद्री क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि यह संस्थान आठ दशकों से अधिक समय से देश की समुद्री और रक्षा जरूरतों में योगदान दे रहा है।
2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत को ऐसा मजबूत समुद्री तंत्र विकसित करना होगा, जिसमें नौसेना के साथ जहाज निर्माण कंपनियां, रक्षा अनुसंधान संस्थान, शिक्षण संस्थान, उद्योग, एमएसएमई और स्टार्टअप मिलकर काम करें।
उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य केवल घरेलू जरूरतों के लिए जहाज बनाना नहीं होना चाहिए। देश की जहाज निर्माण कंपनियां भारतीय नौसेना के साथ-साथ मित्र देशों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए भी जहाज और समुद्री सेवाएं उपलब्ध कराने में सक्षम बनें।
राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2047 तक विकसित भारत बनाने का लक्ष्य तय किया गया है। इसके लिए भारत को आत्मनिर्भर, सुरक्षित और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है।
आत्मनिर्भरता के साथ वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर जोर
रक्षा मंत्री के मुताबिक, पिछले एक दशक में भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव आया है। देश अब आयातित रक्षा प्लेटफॉर्म पर निर्भरता कम करते हुए उन्नत प्रणालियों और प्लेटफॉर्म का घरेलू स्तर पर निर्माण करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि भारतीय जहाज निर्माण कारखाने आधुनिक युद्धपोतों और पनडुब्बियों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। भारत का उद्देश्य केवल रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी क्षमता हासिल करना भी है।











