सोशल संवाद/डेस्क : सुप्रीम कोर्ट ने दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) और रिटेलर को मिलने वाली कीमतों में भारी अंतर पर सरकार से सवाल किए। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने पूछा कि पूरा सिस्टम दवा निर्माताओं की मदद क्यों कर रहा है।
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कोर्ट ने नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) को निष्क्रिय बताते हुए सवाल किया कि दवाओं की कीमतों पर लगाम क्यों नहीं लगाई जा रही। कोर्ट ने कहा कि सरकार की नजरों के सामने यह सब हो रहा है, क्या इसे ऐसे ही बेलगाम चलने देना चाहिए। दोनों मामलों की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
मुद्दा ये है कि कई दवाओं की लागत 10-20 रुपए है, यह रिटेलर को 30 रुपए में मिलती है, पर MRP 150-200 रुपए छपा होता है। यही गैप कोर्ट को खटक रहा है। भारत में अस्पताल में भर्ती होने पर खर्च में दवाओं की बड़ी हिस्सेदारी रहती है। ग्रामीण क्षेत्रों में कुल इलाज के खर्च का 19% हिस्सा दवाओं पर खर्च होता है। वहीं, शहरी क्षेत्रों में दवाओं की यह हिस्सेदारी 15% है। यानी, औसतन कुल खर्च का 17% दवाओं पर होता है।










