सोशल संवाद / डेस्क : अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच ईरान की राजधानी तेहरान में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ प्रदर्शन किया गया। बुधवार, 4 नवंबर को तेहरान के एंगेलाब स्क्वायर में आयोजित रैली के दौरान प्रदर्शनकारियों ने इन नेताओं की तस्वीरों वाला एक विशाल बैनर आग के हवाले कर दिया। इस बैनर में अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ की तस्वीर भी शामिल थी।
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यह प्रदर्शन ऐसे समय हुआ, जब अमेरिका के 3 नवंबर को हुए मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने कांग्रेस के दोनों सदनों में बढ़त हासिल की। इससे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। ईरान में प्रदर्शनकारियों ने चुनावी नतीजों को ट्रंप प्रशासन की नीतियों के खिलाफ अमेरिकी जनता के रुख के तौर पर पेश किया। हालांकि, यह प्रदर्शन ईरान सरकार समर्थकों की ओर से आयोजित रैली का हिस्सा था।
1979 में अमेरिकी दूतावास पर कब्जे की बरसी पर प्रदर्शन
तेहरान में यह रैली 4 नवंबर 1979 को अमेरिकी दूतावास पर हुए कब्जे की बरसी के मौके पर आयोजित की गई थी। उस घटना में 52 अमेरिकी नागरिकों और राजनयिकों को 444 दिनों तक बंधक बनाकर रखा गया था। इस घटना के बाद अमेरिका और ईरान के संबंधों में लंबे समय तक तनाव बना रहा।
रैली में हजारों की संख्या में सरकार समर्थक लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका और इजरायल के झंडे जलाए और दोनों देशों के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान ट्रंप और नेतन्याहू के कैरिकेचर भी प्रदर्शित किए गए।
ईरान ने अमेरिकी चुनाव नतीजों को युद्ध से जोड़ा
ईरान के संसद अध्यक्ष और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाकर गालिबफ ने अमेरिकी चुनाव नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि अमेरिकी जनता ने युद्ध के खिलाफ संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिकी सरकार जनता के इस संदेश को नजरअंदाज करती है, तो उसे इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
वहीं, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने कहा कि अमेरिकी चुनाव के नतीजों से वॉशिंगटन की ईरान के प्रति नीति में बड़े बदलाव की उम्मीद करना सही नहीं होगा।
ईरान-अमेरिका के बीच तनाव बरकरार
अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक बातचीत जारी है। हालांकि, क्षेत्र में फिर से बड़े सैन्य टकराव की आशंका बनी हुई है। अमेरिकी चुनाव के नतीजों के बाद भी दोनों देशों के बीच संबंधों में तत्काल सुधार के संकेत नहीं मिले हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी तनाव को अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है।











