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IRCTC का बड़ा फैसला: चलती ट्रेनों में फिर बनेगा खाना, LPG की जगह इंडक्शन स्टोव

By Tamishree Mukherjee

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IRCTC Train Food Service

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सोशल संवाद / डेस्क : पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की आपूर्ति पर पड़े असर के कारण देश में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कमी देखने को मिल रही है। इसका प्रभाव अब भारतीय रेलवे की कैटरिंग सेवाओं पर भी पड़ने लगा है। इसी चुनौती से निपटने के लिए इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (IRCTC) ने चलती ट्रेनों में फिर से खाना पकाने की व्यवस्था शुरू कर दी है।

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हालांकि इस बार खाना पारंपरिक गैस चूल्हों पर नहीं बल्कि आधुनिक इलेक्ट्रिक इंडक्शन स्टोव की मदद से तैयार किया जाएगा। कई साल पहले सुरक्षा और परिचालन कारणों से चलती ट्रेनों में खाना पकाने की प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से बंद कर दिया गया था।

LHB पैंट्री कारों में शुरू हुई इलेक्ट्रिक कुकिंग

रिपोर्ट्स के अनुसार IRCTC ने LHB पैंट्री कारों में बिजली आधारित कुकिंग सिस्टम लागू किया है। देश की अधिकांश प्रीमियम ट्रेनें जैसे राजधानी एक्सप्रेस, शताब्दी एक्सप्रेस, दुरंतो एक्सप्रेस और वंदे भारत एक्सप्रेस LHB कोचों के साथ संचालित होती हैं।

IRCTC के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक (CMD) संजय कुमार जैन ने बताया कि पैंट्री कारों में पहले से मौजूद सुरक्षा सुविधाओं को देखते हुए वेंडर्स को इलेक्ट्रिक माध्यम से खाना पकाने की अनुमति दी गई है। इसके अलावा बड़े रेलवे स्टेशनों पर भी इंडक्शन कुकिंग के लिए अतिरिक्त बिजली व्यवस्था की गई है।

रोजाना 17 लाख यात्रियों को भोजन उपलब्ध कराती है IRCTC

IRCTC वर्तमान में देशभर में लगभग 1,400 ट्रेनों में कैटरिंग सेवाएं संचालित करती है। कंपनी हर साल करीब 58 करोड़ यात्रियों को भोजन उपलब्ध कराती है, जबकि दैनिक आधार पर यह संख्या लगभग 17 लाख यात्रियों तक पहुंचती है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार कैटरिंग नेटवर्क को सुचारू रूप से चलाने के लिए प्रतिदिन करीब 1,000 कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की आवश्यकता होती है। एलपीजी की उपलब्धता में आई कमी को देखते हुए रेलवे ने वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की ओर तेजी से कदम बढ़ाया है।

रेलवे स्टेशनों पर भी बढ़ा इंडक्शन और माइक्रोवेव का उपयोग

IRCTC ने रेलवे स्टेशनों पर संचालित फूड प्लाजा, रिफ्रेशमेंट रूम और जन आहार आउटलेट्स को भी इंडक्शन कुकर और माइक्रोवेव ओवन अपनाने के निर्देश दिए हैं। इस पहल का असर यह हुआ है कि रेलवे किचनों में तैयार होने वाले लगभग 60 प्रतिशत भोजन अब बिजली के माध्यम से पकाए जा रहे हैं। इससे एलपीजी पर निर्भरता कम हुई है और संचालन को जारी रखने में मदद मिली है।

बढ़ती लागत से प्रभावित हुआ IRCTC का कैटरिंग कारोबार

पश्चिम एशिया संकट और ईंधन लागत में वृद्धि का असर IRCTC की आय पर भी पड़ा है। वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में कंपनी के कैटरिंग सेगमेंट का EBIT मार्जिन घटकर 6.3 प्रतिशत रह गया, जो पहले 10.4 प्रतिशत था।

विश्लेषकों का मानना है कि बढ़ती लागत के बीच IRCTC के सामने लाभप्रदता बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है। विशेषज्ञों के अनुसार कैटरिंग शुल्क में आखिरी संशोधन वर्ष 2019 में किया गया था। ऐसे में भविष्य में या तो किराए में संशोधन करना पड़ सकता है या फिर यात्रियों की संख्या और बिक्री में लगातार वृद्धि सुनिश्चित करनी होगी। हालांकि IRCTC के CMD संजय कुमार जैन ने कीमतों में संभावित बढ़ोतरी पर कोई टिप्पणी करने से इनकार किया और कहा कि कैटरिंग शुल्क तय करने का अधिकार रेलवे मंत्रालय के पास है।

341 लंबी दूरी की ट्रेनों में अब भी नहीं है पैंट्री सुविधा

विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा संकट ने रेलवे कैटरिंग ढांचे की कुछ कमजोरियों को भी उजागर किया है। संसदीय आंकड़ों के अनुसार देश की 341 लंबी दूरी की ट्रेनों में अब भी पैंट्री कार की सुविधा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में रेलवे के सामने यात्रियों को गुणवत्तापूर्ण और समय पर भोजन उपलब्ध कराने की चुनौती बनी हुई है। इंडक्शन आधारित कुकिंग मॉडल को भविष्य में रेलवे कैटरिंग सेवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प माना जा रहा है।

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