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BLO नाम पूछे तो बंद करो… SIR पर इरफान अंसारी के बिगड़े बोल, EC ने मांगी रिपोर्ट, दी सफाई

By Aditi Pandey

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Irfan Ansari harsh words on SIR

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सोशल संवाद/राँची: अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहने वाले झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी के SIR पर बयान से एकबार फिर सियासी माहौल गरमा दिया है। इरफान अंसारी ने चुनाव आयोग की ओर से चलाए जा रहे मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR पर विवादित बयान दिया है।

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उन्होंने एक सभा में कहा कि यदि कोई बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) आपके इलाके में एसआईआर के तहत वोटर लिस्ट से नाम काटने के लिए उसे घर में बंद कर दें। इस पर भाजपा ने पलटवार किया है तो चुनाव आयोग ने भी झारखंड सरकार से रिपोर्ट तलब कर ली है।

जामताड़ा जिले में आयोजित सेवा के अधिकार सप्ताह कार्यक्रम में मंत्री ने कहा कि अगर कोई बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) उनके इलाके में एसआईआर के तहत वोटर लिस्ट से नाम काटने के लिए घर आए तो उसे घर में बंद कर दें। उन्होंने लोगों से भी अपील की कि एसआईआर के नाम पर आने वाले अधिकारियों को किसी भी कीमत पर नाम काटने न दें और उनकी जानकारी सीधे उनसे साझा करें।

इस बयान के बाद भाजपा ने अंसारी की तीखी आलोचना करते हुए इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं का उल्लंघन और अराजकता को बढ़ावा देने वाला करार दिया है। भाजपा प्रवक्ता अजय साह ने कहा कि मंत्री ने संविधान की शपथ तो ली है लेकिन सरकारी अधिकारियों को बंधक बनाने की बात कर रहे हैं। गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे ने भी इसे हिटलरशाही बताया और चेतावनी दी कि किसी भी घटना की जिम्मेदारी मंत्री पर होगी।

लोकतंत्र को बंधक बनाने की निंदनीय कोशिश : भाजपा

भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा- झारखंड के मंत्री इरफान अंसारी सार्वजनिक तौर पर बोलते हैं कि अगर चुनाव आयोग का कोई बूथ स्तर का अधिकारी आपके पास जानकारी लेने आए तो उसे बंधक बना लो। मैं इंडी गठबंधन से पूछना चाहता हूं कि यह लोकतंत्र को बंधक बनाने की निंदनीय कोशिश है या नहीं? क्या संविधान खतरे में है या नहीं? दरअसल, जहां इंडी गठबंधन के लोग सत्ता में आते हैं, वहां संविधान की भावना दरकिनार कर दी जाती है। किस के लिए? कुछ संदिग्ध स्रोतों से वोट प्राप्त करके सत्ता पर काबिज होने के लिए।

चुनाव आयोग ने झारखंड सरकार से इस मुद्दे पर रिपोर्ट मांगी है। चुनाव आयोग ने कहा है कि एसआईआर एक संवैधानिक प्रक्रिया है जिसका उद्देश्य मतदाता सूची को साफ-सुथरा बनाना है। झारखंड में इस प्रक्रिया का अभी पूर्वाभ्यास चल रहा है, लेकिन राजनीतिक दल इसे चुनावी हथियार बना रहे हैं। एसआईआर की प्रक्रिया में मतदाता सूची से मृत, फर्जी या अयोग्य मतदाताओं के नाम हटाने और नए पात्र मतदाताओं को जोड़ने का काम होता 
इस पूरे प्रकरण पर इरफान अंसारी की सफाई भी आ गई है।

उन्होंने एक्स पर अपने एक पोस्ट में लिखा- कुछ मीडिया संस्थानों ने मेरी बातों को गलत संदर्भ में पेश किया है जिसकी मैं कड़ी निंदा करता हूं। मैंने केवल इतना कहा था कि हमारे क्षेत्र में कुछ फर्जी लोग नकली BLO बनकर गरीबों को डराने और पैसे वसूलने की कोशिश कर रहे थे। ऐसे लोगों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए और यदि कोई संदिग्ध व्यक्ति नाम काटने या कोई अवैध कार्य करने आए तो उसकी सूचना तुरंत हमें और प्रशासन को दें।

इरफान अंसारी ने आगे कहा है कि BLO चुनाव आयोग के अंग और हमारे सम्मानित पदाधिकारी हैं। उनकी जगह कोई फर्जी व्यक्ति नहीं ले सकता। मैंने केवल यह मांग की है कि चुनाव आयोग सही तरीके से प्रक्रिया चलाए ताकि किसी गरीब, वंचित या आम नागरिक का नाम गलत तरीके से न कटने पाए। SIR जैसे किसी भी प्रस्ताव का झारखंड में लागू होना करोड़ों लोगों को प्रभावित करेगा, इसलिए इस पर जनता के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा जरूरी है। मैं हमेशा लोकतंत्र, संविधान और जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हूं।

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