सोशल संवाद / डेस्क : दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ की मांग को लेकर छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी है। छात्र एबिन और मोहम्मद रेहान की भूख हड़ताल मंगलवार को 17वें दिन भी जारी रही। इस बीच विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से धरनास्थल खाली करने का नोटिस जारी किए जाने और परिसर के आसपास सुरक्षा व्यवस्था सख्त करने से तनाव बढ़ गया है। वहीं, बॉलीवुड अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने छात्रों के समर्थन में आवाज उठाते हुए सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन के रवैये पर सवाल खड़े किए हैं।
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जामिया में 17 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे छात्र
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रसंघ की मांग को लेकर छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्र एबिन और मोहम्मद रेहान पिछले 17 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि उनकी मांगों पर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अब तक संतोषजनक कार्रवाई नहीं की गई है। वहीं, प्रशासन ने धरनास्थल खाली करने के लिए नोटिस जारी किया है। इस घटनाक्रम के बाद विश्वविद्यालय परिसर में विरोध प्रदर्शन और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर विवाद गहरा गया है।
जामिया के आसपास धारा 163 लागू, सुरक्षा व्यवस्था सख्त
मंगलवार को पुलिस ने जामिया परिसर के आसपास भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किए। इस प्रावधान के तहत प्रशासन सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक प्रतिबंध लगा सकता है।
इसी बीच जामिया हॉस्टल के पास स्थित गेट नंबर 4-C को विश्वविद्यालय प्रशासन ने टिन शेड लगाकर और वेल्डिंग कर बंद कर दिया था। बताया जा रहा है कि देर रात कुछ छात्रों ने सरिया और अन्य उपकरणों की मदद से इस अवरोध को हटा दिया। इस घटना के बाद परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
नसीरुद्दीन शाह ने छात्रों के समर्थन में जारी किया वीडियो
जामिया में जारी प्रदर्शन के बीच मशहूर अभिनेता नसीरुद्दीन शाह का एक वीडियो संदेश सामने आया है। इसमें उन्होंने छात्रों के प्रति समर्थन जताते हुए सरकार की आलोचना की। वीडियो में उन्होंने खुद को गर्व के साथ ‘दिमागी नक्सल’ बताया और कहा कि असहमति जताने वालों को अलग-अलग नामों से संबोधित किया जाता रहा है।
उन्होंने सरकार से सवाल किया कि देश के युवाओं का हौसला तोड़ने और शिक्षण संस्थानों को कमजोर करने के लिए आखिर कितने कदम उठाए जाएंगे। उनके इस बयान के बाद छात्रों के विरोध प्रदर्शन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर बहस तेज हो सकती है।
JNU से लेकर जामिया तक की घटनाओं का किया जिक्र
नसीरुद्दीन शाह ने अपने वीडियो संदेश में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU), सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट और जामिया मिल्लिया इस्लामिया का जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षण संस्थानों में विरोध करने वाले छात्रों के साथ जिस तरह का व्यवहार किया जा रहा है, उसे भुलाया नहीं जाएगा।
शाह ने कहा कि छात्रों के साथ होने वाली घटनाओं को लोग याद रखेंगे। उनका बयान शिक्षा संस्थानों में लोकतांत्रिक अधिकारों और छात्र आंदोलनों के प्रति उनके समर्थन को दर्शाता है।
बिजली-पानी बंद करने के आरोपों पर भी विवाद
प्रदर्शन के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में बिजली और पानी की आपूर्ति बंद किए जाने के आरोप भी सामने आए हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों की मांगों की अनदेखी और बुनियादी सुविधाओं को लेकर उठे सवालों पर नसीरुद्दीन शाह ने नाराजगी जताई।
हालांकि, बिजली-पानी की आपूर्ति बंद होने के कारणों और प्रशासन की ओर से उठाए गए कदमों के संबंध में आधिकारिक स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
छात्रसंघ की मांग पर जारी है गतिरोध
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रसंघ की मांग को लेकर जारी आंदोलन अब एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है। एक तरफ छात्र अपनी मांगों को लेकर भूख हड़ताल पर डटे हुए हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन ने धरनास्थल खाली करने का नोटिस जारी किया है।
पुलिस की ओर से प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किए जाने और नसीरुद्दीन शाह के बयान के बाद इस मामले ने और ध्यान खींचा है।
फिलहाल छात्रों की मांगों पर कोई अंतिम समाधान सामने नहीं आया है। अब देखना होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच बातचीत से गतिरोध समाप्त होता है या आंदोलन आगे भी जारी रहता है।










