सोशल संवाद/डेस्क: झारखंड में माओवादी गतिविधियों में कमी आने के बाद केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती घटाने की तैयारी की जा रही है। राज्य सरकार ने अगले तीन वर्षों में कोबरा और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की कुल नौ बटालियनों को वापस भेजने का प्रस्ताव तैयार किया है। हालांकि, इस प्रस्ताव पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। सरकार का उद्देश्य केंद्रीय बलों की तैनाती पर होने वाले खर्च को कम करना और सुरक्षा व्यवस्था को मौजूदा हालात के अनुरूप बनाना है।
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झारखंड में फिलहाल कितनी कंपनियां तैनात?
रिपोर्ट के मुताबिक, वर्तमान में झारखंड में कोबरा की तीन बटालियनों की 18 कंपनियां और CRPF की नौ बटालियनों की 63 कंपनियां तैनात हैं। इस तरह दोनों बलों की कुल 81 कंपनियां राज्य में प्रतिनियुक्त हैं। इनमें से 18 कंपनियां फिलहाल प्रशिक्षण ले रही हैं। इसके अलावा सशस्त्र सीमा बल (SSB) की 18 कंपनियां भी झारखंड में तैनात हैं।
तीन साल में सिर्फ तीन बटालियनें रखने का प्रस्ताव
राज्य सरकार के प्रस्ताव के अनुसार, अगले तीन वर्षों में झारखंड में कोबरा की एक और CRPF की दो बटालियनें ही प्रतिनियुक्त रह सकती हैं। इस योजना के लागू होने पर कोबरा और CRPF की कुल नौ बटालियनें राज्य से वापस भेजी जा सकती हैं।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि अभी इस प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी नहीं मिली है। इसलिए इसे सुरक्षा बलों की वापसी का अंतिम निर्णय नहीं माना जाना चाहिए।
माओवादी विरोधी अभियानों में झारखंड पुलिस की अहम भूमिका
एक समय झारखंड के कई जिले माओवादी गतिविधियों से प्रभावित थे। माओवादियों के खिलाफ अभियान चलाने के लिए CRPF, कोबरा और SSB के जवानों को राज्य में तैनात किया गया था। इन अभियानों में झारखंड पुलिस और झारखंड जगुआर ने भी केंद्रीय बलों के साथ मिलकर काम किया।
लगातार चलाए गए संयुक्त अभियानों के बाद राज्य में माओवादी गतिविधियों में कमी आई है। पश्चिमी सिंहभूम के सारंडा और कोल्हान जैसे क्षेत्रों में भी माओवादी विरोधी अभियान चलाए जाते रहे हैं।
दूसरे राज्यों में भी भेजे जाते हैं जवान
झारखंड में तैनात केंद्रीय सुरक्षा बलों का इस्तेमाल केवल माओवादी विरोधी अभियानों तक सीमित नहीं रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, जवानों को अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा, चुनावी ड्यूटी और दूसरे राज्यों के विशेष अभियानों में भी भेजा जाता रहा है।
यदि नौ बटालियनों की वापसी का प्रस्ताव लागू होता है, तो संबंधित बटालियनों के मुख्यालय भी झारखंड से बाहर स्थानांतरित हो सकते हैं। इससे राज्य में केंद्रीय बलों की तैनाती और उनके संचालन की व्यवस्था में बदलाव आएगा।
खर्च कम करना है सरकार का उद्देश्य
राज्य सरकार का मानना है कि माओवादी गतिविधियों में कमी के बाद केंद्रीय बलों की तैनाती की समीक्षा की जा सकती है। प्रस्ताव के जरिए सुरक्षा बलों पर होने वाले खर्च को कम करने की योजना है। हालांकि, बलों की वास्तविक संख्या में बदलाव और वापसी का समय अंतिम निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा।











