सोशल संवाद, डेस्क: बिहार सरकार ने बुधवार को ‘जेपी सेनानियों’ की पेंशन राशि में दोगुनी वृद्धि की घोषणा की. ये राजनीतिक कार्यकर्ता आपातकाल के दौरान समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण के आंदोलन का समर्थन करने के लिए जेल गए थे. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को मंज़ूरी दी गई. नीतीश कुमार स्वयं आपातकाल की घोषणा से एक साल पहले 1974 में शुरू हुए ‘जेपी आंदोलन’ में एक प्रमुख भागीदार थे.

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, छह महीने से ज़्यादा जेल में रहने वाले ‘जेपी सेनानियों’ की पेंशन 15,000 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये प्रति माह कर दी गई है और कम अवधि की जेल की सज़ा काटने वालों की पेंशन 7,500 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये कर दी गई है. यह फैसला राज्य में इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले लिया गया है.
कुमार ने 2009 में जयप्रकाश नारायण के नाम पर पेंशन योजना शुरू की थी. हालांकि मुख्यमंत्री पेंशन के लिए आवश्यक शर्तें पूरी करते हैं, लेकिन उन्होंने इसके लिए कभी आवेदन नहीं किया.
राजद प्रमुख लालू प्रसाद भी इस योजना के लाभार्थियों में से एक हैं.एक अधिकारी ने बताया, प्रदेश में औद्योगिक क्षेत्र नेटवर्क के विस्तार, निवेश को प्रोत्साहित करने और रोजगार के अवसर सृजित करने के उद्देश्य से कैबिनेट ने 812 करोड़ रुपये की लागत से 2,627 एकड़ भूमि के अधिग्रहण की भी मंजूरी दी.
कैबिनेट ने ‘जीविका दीदियों’ को बढ़ा हुआ मानदेय प्रदान करने के लिए ग्रामीण विकास विभाग को 347.51 करोड़ रुपये जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी. उन्होंने बताया कि ‘जीविका दीदियां’ वे महिलाएं हैं जो स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हुई हैं और यह परियोजना गरीबी उन्मूलन तथा महिलाओं के सशक्तीकरण के उद्देश्य से चलाई जा रही है.










