सोशल संवाद /रांची:झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के बड़े ऐलान के बाद भी पूरी तरह खत्म होता नजर नहीं आ रहा है। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो समेत कुछ आंदोलनकारियों ने सरकार के फैसले के बाद भूख हड़ताल समाप्त कर दी, लेकिन आंदोलन की प्रमुख मांगों को लेकर अब भी आवाज उठ रही है। इसी बीच डुमरी विधायक जयराम महतो देर रात जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम पहुंचे और छात्रों के बीच अपना रुख स्पष्ट किया।

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जयराम महतो ने कहा कि भूख हड़ताल खत्म हो सकती है, लेकिन छात्रों का आंदोलन खत्म नहीं हुआ है। उन्होंने साफ किया कि जब तक आंदोलनकारियों की सभी प्रमुख मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।
CBI जांच को लेकर अब भी मांग
जयराम महतो के मुताबिक आंदोलन की सबसे अहम मांगों में JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की CBI जांच शामिल है। उन्होंने कहा कि केवल परीक्षा रद्द कर देना आंदोलन की सभी मांगों का समाधान नहीं है। छात्रों की मांग है कि परीक्षा प्रक्रिया में हुई कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
विधायक ने आंदोलनकारियों को भरोसा दिलाया कि वे छात्रों की मांगों के साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि भूख हड़ताल खत्म होने का अर्थ यह नहीं लगाया जाना चाहिए कि छात्रों ने अपने बाकी मुद्दों से समझौता कर लिया है।
सरकार के फैसले के बाद बदला माहौल
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद सरकार ने JSSC-CGL और TDPL से जुड़ी परीक्षाओं को रद्द करने का ऐलान किया। इसके बाद छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी। रांची सदर अस्पताल में उन्हें जूस पिलाकर अनशन समाप्त कराया गया।
सरकार के इस फैसले को आंदोलनकारियों ने बड़ी उपलब्धि बताया, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, कथित अनियमितताओं की जांच और अन्य मांगों पर कार्रवाई जरूरी है।
आंदोलन अभी खत्म नहीं
जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्रों के आंदोलन को लेकर जयराम महतो का बयान ऐसे समय आया है, जब सरकार के फैसले के बाद आंदोलन के अगले चरण को लेकर चर्चा तेज है। उनके बयान से संकेत साफ है कि अनशन समाप्त होने के बावजूद छात्रों का आंदोलन आगे जारी रह सकता है।
अब छात्रों की नजर सरकार की अगली कार्रवाई पर है। खासकर जांच की प्रक्रिया, नई परीक्षा व्यवस्था और लंबित मांगों पर सरकार कब और क्या कदम उठाती है, यह आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण रहेगा।
छात्र आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि उनका संघर्ष केवल एक परीक्षा को रद्द कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि भर्ती परीक्षाओं की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने की मांग से जुड़ा है।









