सोशल संवाद/डेस्क : डिजिटल युग में बढ़ते स्क्रीन टाइम और इसके बच्चों पर पड़ रहे असर को देखते हुए कर्नाटक सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। राज्य सरकार ने छात्रों के बीच डिजिटल तकनीक के जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देने के लिए एक नई डिजिटल पॉलिसी का मसौदा तैयार किया है, जिसमें कई सख्त और जरूरी प्रावधान शामिल किए गए हैं।
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इस प्रस्तावित नीति के अनुसार, 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की गई है। साथ ही, पढ़ाई के अलावा मनोरंजन के लिए स्क्रीन टाइम को प्रतिदिन अधिकतम एक घंटे तक सीमित रखने का सुझाव दिया गया है। यह फैसला बच्चों में बढ़ती इंटरनेट लत और उसके मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में करीब 25% किशोर इंटरनेट की लत के लक्षण दिखा रहे हैं। इससे उनमें चिंता, नींद की समस्या और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई जैसी परेशानियां बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अनियंत्रित डिजिटल उपयोग बच्चों के मानसिक विकास पर गंभीर असर डाल रहा है, जिसे समय रहते नियंत्रित करना बेहद जरूरी है।
इस नीति को तैयार करने में कर्नाटक राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण, शिक्षा विभाग और राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान की अहम भूमिका रही है। इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों में डिजिटल वेलनेस, भावनात्मक संतुलन और तकनीक के सही उपयोग को बढ़ावा देना है।
पॉलिसी के तहत स्कूलों में “डिजिटल वेलनेस कमेटी” बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। यह कमेटी छात्रों में तकनीक की लत के शुरुआती संकेतों की पहचान करेगी और जरूरत पड़ने पर उन्हें काउंसलिंग भी उपलब्ध कराएगी। इसके अलावा शिक्षकों को विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि वे छात्रों के डिजिटल व्यवहार को बेहतर तरीके से समझ सकें और उसे नियंत्रित करने में मदद कर सकें।
अभिभावकों की भूमिका को भी इस नीति में बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। उन्हें बच्चों के लिए एक संतुलित दिनचर्या बनाने, स्क्रीन टाइम सीमित करने और ऑफलाइन गतिविधियों को बढ़ावा देने की सलाह दी गई है। साथ ही बच्चों को साइबरबुलिंग, ऑनलाइन फ्रॉड और डिजिटल शोषण के बारे में जागरूक करने के लिए भी गाइडलाइंस तैयार की जाएंगी।
नीति में डिजिटल डिटॉक्स पर भी विशेष जोर दिया गया है। इसके तहत शिक्षकों के लिए एक दिवसीय ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित किए जाएंगे, जहां उन्हें डिजिटल संतुलन और बच्चों को इससे दूर रखने के तरीके सिखाए जाएंगे।
कुल मिलाकर, यह पहल छात्रों के लिए एक सुरक्षित, संतुलित और स्वस्थ डिजिटल वातावरण तैयार करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। सरकार का उद्देश्य है कि स्कूल, परिवार और प्रशासन मिलकर बच्चों को तकनीक के सही और सीमित उपयोग के लिए प्रेरित करें, ताकि उनका मानसिक और भावनात्मक विकास बेहतर तरीके से हो सके।









