स्वास्थ्य विभाग की भर्ती में भी कमीशन , सीआईडी की पूछताछ में अभय तिवारी ने किया कबूल

By Riya Kumari

Published :

Follow
स्वास्थ्य विभाग की भर्ती में भी कमीशन , सीआईडी की पूछताछ में अभय तिवारी ने किया कबूल

Join WhatsApp

Join Now

सोशल संवाद / रांची : जेपीएससी के साथ-साथ जेएसएससी में भी इंपैनलमेंट के लिए डील की गई थी। टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह व अभय तिवारी ने यह जानकारी सीआईडी को दी है। पूछताछ में यह बात भी सामने आई है कि स्वास्थ्य विभाग में भी अनुबंध आधारित भर्तियों में अभय ने जेएसआर एजेंसी के जरिए नौ लाख कमीशन कमाए थे।

यह भी पढे : श्रावणी मेले में श्रद्धालुओं को बड़ी राहत:बासुकीनाथ-गोरखपुर के बीच 17 अगस्त से विशेष ट्रेन

सीआईडी को अभय ने बताया कि टीडीपीएल निदेशक रामवीर सिंह और सत्यपाल सिंह से उसका संपर्क दिल्ली के शैंटी ने कराया था। अधिकारियों से अभय की नजदीकी का हवाला देकर टीडीपीएल ने अभय से वादा किया था कि काम दिलाने के एवज में बिलिंग पर उसे 10 प्रतिशत कमीशन दिया जाएगा। अभय ने यह भी बताया कि जेएसएससी के असिस्टेंट सेक्शन अफसर प्रेम कुमार से उसके अच्छे संबंध थे। उन संबंधों के जरिए उसने टीडीपीएल को जेएसएससी में इंपैनल कराया। इसके एवज में अभय और प्रेम को पांच-पांच लाख मिले थे।

अभय के अनुसार, इस कंपनी को बायोमेट्रिक्स का काम मिला था, पर रेट कम होने पर कंपनी ने काम नहीं किया, तब जेएसएससी से डी-इंपैनल किया गया। अभय ने जेएसएससी में वेबल कंपनी का भी इंपैनलमेंट कराया, जिसकी भूमिका सीजीएल में संदिग्ध रही। रामवीर सिंह ने भी स्वीकारा कि अभयने जेएसएससी में टीडीपीएल का इंपैनलमेंट कराया था। अभय ने यह भी बताया कि वर्ष 2023 में जेएसआर एजेंसी से वह जुड़ा था। स्वास्थ्य विभाग में इस एजेंसी के जरिए अनुबंध पर बहाली करवाकर नौ लाख कमाए थे।

डॉ. अनिमा हांसदा ने किसी संलिप्तता से किया इनकार

सीआईडी ने शुक्रवार को जेपीएससी की तत्कालीन सदस्य रहीं डॉ. अनिमा हांसदा से भी पूछताछ की। डॉ. हांसदा ने संदिग्ध गतिविधि में संलिप्तता से साफ इनकार किया है। सीआईडी के अनुसार, तत्कालीन चेयरमैन ख्यांग्ते के द्वारा टीडीपीएल (परीक्षा एजेंसी) के चयन, 14वीं जेपीएससी परीक्षा के परिणाम को लेकर उठे विवाद समेत अन्य बिंदुओं पर पूछताछ की। बता दें कि बयान में किसी आरोपी ने डॉ अनिमा का नाम संदिग्ध के तौर पर नहीं बताया है।

अरुण शर्मा का 15 से अधिक राज्यों में फैला है नेटवर्क

बिनसिस कंपनी के निदेशक अरुण कुमार शर्मा का नेटवर्क झारखंड ही नहीं, 15 राज्यों में है। इन राज्यों की परीक्षा कराने वाले आयोगों में उसकी कंपनी लंबे समय से इंपैनल है। साल 2006 से ही वह परीक्षा क्रियान्वयन एजेंसी का संचालन अपने भाई के साथ कर रहा है। आईआईटी ग्रेजुएट अरुण कुमार शर्मा के खिलाफ बिहार में एक दर्जन से अधिक केस दर्ज हैं। वहीं पूर्व में भी कई परीक्षाओं से जुड़े विवाद में बिनसिस की भूमिका रही है। जेएसएससी से ब्लैकलिस्ट होने के बाद भी बिनसिस को जेपीएससी में जेटेट परीक्षा के क्रियान्वयन का काम मिला था।

YouTube Join Now
Facebook Join Now
Social Samvad MagazineJoin Now
---Advertisement---

संबंधित पोस्ट

Exit mobile version