सोशल संवाद / जमशेदपुर: XLRI-जेवियर स्कूल ऑफ मैनेजमेंट, जमशेदपुर में वार्षिक प्रमुख CHRO कॉन्क्लेव KRONOS 2026 के छठे संस्करण का आयोजन किया गया। PGDM (GM) कॉन्क्लेव कमेटी, कॉरपोरेट रिलेशंस एवं प्लेसमेंट विभाग की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में 23 मुख्य मानव संसाधन अधिकारियों (CHROs) और वरिष्ठ HR विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। कॉन्क्लेव का मुख्य विषय “भविष्य की कंपनी का निर्माण कौन करेगा? नेतृत्व, प्रतिभा और प्रदर्शन के नए नियम” रहा।
कार्यक्रम में भविष्य की कंपनियों के स्वरूप, नेतृत्व की बदलती भूमिका, प्रतिभाओं के विकास, कर्मचारियों के प्रदर्शन और संगठनात्मक संरचना को अधिक प्रभावी बनाने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि बदलते कारोबारी माहौल और तकनीकी विकास के बीच कंपनियों को ऐसी कार्यसंस्कृति विकसित करनी होगी, जो नवाचार, जवाबदेही और मानवीय क्षमताओं को प्रोत्साहित करे।
कॉन्क्लेव का उद्घाटन XLRI जमशेदपुर के डीन (एकेडमिक्स) डॉ. संजय पात्रो और एसोसिएट डीन-कॉरपोरेट प्रोग्राम्स एवं VIL प्रो. सुनील कुमार सारंगी ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर कई प्रतिष्ठित HR विशेषज्ञ और उद्योग जगत के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
उद्घाटन संबोधन में डॉ. संजय पात्रो ने वर्ष 1984-85 के दौरान भारत में शुरू हुए तकनीकी बदलावों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस समय बैंकों और रेलवे में कंप्यूटरीकरण को लेकर कर्मचारियों के बीच विरोध देखने को मिला था, लेकिन आगे चलकर तकनीकी क्षेत्र युवाओं के लिए रोजगार के बड़े अवसर पैदा करने वाला क्षेत्र बन गया। इसी उदाहरण के आधार पर उन्होंने वर्तमान समय में भारत की तकनीकी और औद्योगिक क्षमता से एक नए परिवर्तन की संभावना पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि दुनिया की लगभग छठी आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाले भारत के सामने अपनी सामूहिक बुद्धिमत्ता और प्रतिभा का उपयोग व्यापक सामाजिक हित में करने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने विद्यार्थियों से उद्योग जगत के विशेषज्ञों के साथ सक्रिय संवाद करने और भविष्य की विभिन्न संभावनाओं को समझते हुए खुद को उसके अनुरूप तैयार करने का आह्वान किया।
संगठनात्मक ढांचे में बदलाव और जवाबदेही पर चर्चा
कॉन्क्लेव के पहले पैनल का विषय “द ऑर्गनाइजेशन विदाउट ए ब्लूप्रिंट” रहा। इसमें दो समानांतर सत्र आयोजित किए गए, जिनमें बदलते कारोबारी परिवेश के अनुरूप संगठनात्मक ढांचे को अधिक लचीला और प्रभावी बनाने पर चर्चा हुई।
पहले सत्र का संचालन XLRI के PGDM (GM) कार्यक्रम के विद्यार्थी अनीश चोपड़ा ने किया। इसमें फोर्नैक्स के अभिषेक नाग, सिस्को के गौरव अहलूवालिया, कलामंदिर ज्वेलर्स ग्रुप के प्रोसेंजीत मुखर्जी, KPMG इंडिया की रीना वाही, NaBFID के संजीव वैद और Axeno Consulting की स्वाति मुडगल ने भाग लिया।

पैनल विशेषज्ञों ने उद्देश्य आधारित संगठनात्मक संरचना, ग्राहक-केंद्रित कार्यप्रणाली, पारदर्शी जवाबदेही और खुले संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया। संजीव वैद ने बताया कि NaBFID ने उद्देश्य, जवाबदेही और ग्राहकों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए केवल तीन परिचालन स्तरों वाली संरचना विकसित की है। वहीं, प्रोसेंजीत मुखर्जी ने अधिकारों और जिम्मेदारियों के स्पष्ट निर्धारण के लिए प्रभावी डेलिगेशन ऑफ अथॉरिटी मैट्रिक्स के महत्व को रेखांकित किया।
चर्चा में कहा गया कि कंपनियों को अनावश्यक नौकरशाही कम करते हुए संगठनात्मक लचीलापन बनाए रखना चाहिए। साथ ही, निर्णय लेने की प्रक्रिया में मानवीय विवेक और अनुभव को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया जाना चाहिए।
इसी विषय पर आयोजित दूसरे सत्र का संचालन PGDM (GM) की छात्रा अंशिता दागा ने किया। इसमें Axeno Consulting की बुशरा मेहदी, Genzeon की जननी प्रकाश, Snowflake की कविता टंडन, PwC AC India की संध्या नांबियार और Iris Software के शरद वर्मा शामिल हुए।
विशेषज्ञों ने बताया कि कठोर पदानुक्रम और जटिल प्रक्रियाएं निर्णय लेने की गति को प्रभावित कर सकती हैं। उन्होंने मध्य प्रबंधन को अधिक अधिकार देने, भर्ती के दौरान सीखने की क्षमता को प्राथमिकता देने और प्रबंधकों को ऐसे दलों का नेतृत्व करने के लिए तैयार करने की आवश्यकता बताई, जिनमें मनुष्यों के साथ AI एजेंट भी काम करेंगे।
पैनल का निष्कर्ष रहा कि संगठनात्मक ढांचा कंपनी की रणनीति के अनुरूप होना चाहिए और कारोबारी जरूरतों में बदलाव के साथ उसमें भी आवश्यक परिवर्तन किए जाने चाहिए।
प्रदर्शन और दक्षता के बीच संतुलन जरूरी
दूसरे पैनल का विषय “द परफॉर्मेंस पैराडॉक्स” रहा। इसका संचालन PGDM (GM) के विद्यार्थी निमिष बत्रा ने किया। पैनल में Daimler Truck Innovation Center India के हर्षवर्धन कुंडलकर, Acer की इंदु रश्मि, Omega Seiki Mobility के नितिन खिंदरिया, Hindalco Industries Limited के समिक बसु, Accenture के सिद्धार्थ मुखर्जी और NaBFID के सौमिक रॉय ने अपने विचार रखे।
चर्चा का मुख्य केंद्र कार्यकुशलता बढ़ाने के साथ दीर्घकालिक संगठनात्मक क्षमता को मजबूत बनाए रखना रहा। विशेषज्ञों ने समस्याओं के समाधान के लिए शुरुआत से अंत तक समग्र दृष्टिकोण अपनाने, प्रतिभाशाली कर्मचारियों की बेहतर भागीदारी, सामूहिक जिम्मेदारी और स्पष्ट रणनीति को आवश्यक बताया।
उन्होंने चेताया कि केवल विभागीय लक्ष्य हासिल करने या आंकड़ों के आधार पर प्रदर्शन का आकलन करने से संगठन की वास्तविक स्थिति का पता नहीं चलता। विभागों के बीच प्रतिस्पर्धा, कर्मचारियों की घटती भागीदारी और अलग-अलग इकाइयों में सीमित सोच संगठन की समग्र प्रगति में बाधा बन सकती है।
इस दौरान “वॉटरमेलन इफेक्ट” पर भी चर्चा हुई। इसमें प्रदर्शन से जुड़े डैशबोर्ड और आंकड़े ऊपर से अच्छे दिखाई देते हैं, लेकिन संगठन की आंतरिक कार्यसंस्कृति और कर्मचारियों के अनुभव वास्तविक स्थिति से अलग तस्वीर पेश करते हैं। विशेषज्ञों ने कहा कि कंपनियों को केवल आंकड़ों पर निर्भर रहने के बजाय कार्यस्थल के वास्तविक माहौल और कर्मचारियों की भागीदारी को भी समझना चाहिए।
रोजगार की बदलती परिभाषा पर विशेषज्ञों ने रखे विचार
तीसरे पैनल का विषय “द न्यू एम्प्लॉयमेंट डील” रहा। इसका संचालन PGDM (GM) के विद्यार्थी वामसीधर अधिनारायण ने किया। पैनल में TVS Motor Company के कार्तिक पंचापकेसन, Cyient की कविता कुरुप, Deloitte Consulting India Private Limited के पार्वथराजन मुथुसामी, Zydus Wellness के शांतनु दास, Tata Steel की सोनी सिन्हा और Tata Chemicals Limited के श्रीनिवास सीआर ने भाग लिया।
इस सत्र में विद्यार्थियों के लिए एक संवादात्मक गतिविधि आयोजित की गई। इसमें रंगीन कार्ड के माध्यम से प्रतिभागियों से नेतृत्व के रिक्त पद को भरने के लिए उपयुक्त व्यक्ति के चयन पर मतदान कराया गया। इस गतिविधि ने प्रतिभा चयन और नेतृत्व संबंधी निर्णयों को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण सामने रखे।
Tata Steel की सोनी सिन्हा ने कहा कि नेतृत्व की जरूरतें संगठन की प्रकृति और कारोबारी परिस्थितियों पर निर्भर करती हैं। विनिर्माण क्षेत्र में अनुभव से प्राप्त व्यावहारिक ज्ञान और स्थिरता महत्वपूर्ण होती है, जबकि तेजी से बदलते कारोबारी क्षेत्रों में कम समय में परिणाम देने और तेजी से काम करने की क्षमता अधिक मायने रखती है।
विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum) के वर्ष 2030 तक रोजगार और कौशल में बड़े बदलावों से जुड़े अनुमानों का उल्लेख करते हुए पैनल विशेषज्ञों ने कहा कि रोजगार संबंधी पारंपरिक सोच तेजी से बदल रही है। अब केवल नौकरी की सुरक्षा पर निर्भर रहने के बजाय कर्मचारियों की रोजगार-योग्यता, नए कौशल सीखने की क्षमता और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढालने की योग्यता अधिक महत्वपूर्ण होती जा रही है।
विशेषज्ञों ने तकनीकी बदलावों के दौर में मनोवैज्ञानिक सुरक्षा, जिज्ञासा और सकारात्मक संगठनात्मक संस्कृति को भी आवश्यक बताया। उनका मानना था कि कर्मचारियों को नए विचार रखने, सवाल पूछने और लगातार सीखने के अवसर मिलने चाहिए, ताकि वे भविष्य की चुनौतियों का बेहतर ढंग से सामना कर सकें।
उद्योग जगत और विद्यार्थियों के बीच संवाद का मंच बना KRONOS
KRONOS 2026 का आयोजन प्रो. डॉ. कनागरज अय्यालुसामी और श्री रजनी रंजन के मार्गदर्शन में PGDM (GM) कॉन्क्लेव कमेटी, बैच 2026-27 की ओर से किया गया। कमेटी में अबिरामी एस., मॉरिस एम., मुस्कान गुप्ता, स्तुति पाटवर्धन और उत्कर्ष सूरी शामिल थे।
कार्यक्रम का संचालन आदित्य मदान, अबिरामी एस., हार्दिक धवन, मानसी पोटनिस, वरुण गोपू और जिज्ञासा हिरावत ने किया।
KRONOS 2026 के माध्यम से XLRI ने उद्योग जगत के वरिष्ठ नेतृत्वकर्ताओं और विद्यार्थियों को एक साझा मंच पर लाकर भविष्य के नेतृत्व, प्रतिभा प्रबंधन और संगठनात्मक प्रदर्शन से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श का अवसर प्रदान किया। इस आयोजन ने जिम्मेदार नेतृत्व विकसित करने, बदलती कारोबारी जरूरतों को समझने और व्यापक सामाजिक हित में प्रबंधन की भूमिका को मजबूत बनाने के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को भी दोहराया।










