सोशल संवाद/डेस्क : झारखंड के लातेहार जिले के बालूमाथ कस्बे में आवारा कुत्ते के हमले से लोगों में दहशत फैल गई। शुक्रवार को एक ही लावारिस कुत्ते ने अलग-अलग जगहों पर राहगीरों और बच्चों को निशाना बनाया। इस घटना में आठ साल के बच्चे से लेकर 35 साल तक के कुल 16 लोग घायल हो गए। लगातार हो रहे हमलों के कारण इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
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घटना के बाद घायल लोग इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे। किसी के पैर में गहरा घाव था, तो किसी के हाथ में गंभीर चोट आई थी। अस्पताल में सभी घायलों का प्राथमिक उपचार किया गया और रेबीज से बचाव के लिए आवश्यक टीकाकरण शुरू किया गया।
दोपहर से रात तक कुत्ते ने 16 लोगों को बनाया शिकार
जानकारी के अनुसार, बालूमाथ में शुक्रवार दोपहर से कुत्ते के हमले की घटनाएं शुरू हुईं। सड़क से गुजर रहे लोगों पर कुत्ता अचानक झपट रहा था। कई लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
अस्पताल के चिकित्सक के अनुसार, रात करीब दस बजे तक कुत्ते के काटने से घायल लोग इलाज के लिए पहुंचते रहे। घायलों में बच्चे और युवा शामिल थे। सभी को आवश्यक उपचार के साथ एंटी-रेबीज वैक्सीन और टिटनेस से बचाव का टीका दिया गया।
इस घटना ने एक बार फिर आवारा कुत्तों से सुरक्षा और रेबीज के प्रति जागरूकता की जरूरत को सामने ला दिया है।
कुत्ते के काटने से क्यों होता है रेबीज का खतरा?
रेबीज एक गंभीर वायरल बीमारी है, जो संक्रमित जानवर की लार के माध्यम से फैल सकती है। संक्रमित कुत्ते के काटने या उसकी लार के खुले घाव के संपर्क में आने से संक्रमण का खतरा रहता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, इंसानों में होने वाले रेबीज के लगभग 99 प्रतिशत मामलों का संबंध संक्रमित कुत्तों से होता है।
यह वायरस शरीर में प्रवेश करने के बाद तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है। एक बार रेबीज के लक्षण दिखाई देने लगें, तो यह बीमारी लगभग हमेशा जानलेवा साबित होती है।
हालांकि, राहत की बात यह है कि समय पर घाव की सफाई, एंटी-रेबीज वैक्सीन और जरूरत पड़ने पर रेबीज इम्यूनोग्लोबुलिन देने से बीमारी को रोका जा सकता है।
कुत्ता काट ले तो तुरंत क्या करें? जानें जरूरी उपाय
कुत्ते के काटने या खरोंच लगने पर घबराने के बजाय तुरंत सही कदम उठाना जरूरी है।
1. घाव को 15 मिनट तक धोएं
कुत्ते के काटने वाली जगह को तुरंत साबुन और बहते पानी से कम से कम 15 मिनट तक अच्छी तरह धोएं। इससे घाव में मौजूद वायरस की मात्रा कम करने में मदद मिलती है।
2. घाव पर घरेलू चीजें न लगाएं
कई लोग कुत्ते के काटने के बाद घाव पर हल्दी, मिर्च, मिट्टी या चूना लगा देते हैं। ऐसा बिल्कुल नहीं करना चाहिए। घाव धोने के बाद उपलब्ध होने पर पोविडोन-आयोडीन जैसे उपयुक्त एंटीसेप्टिक का इस्तेमाल किया जा सकता है।
3. तुरंत अस्पताल पहुंचें
घाव छोटा हो या बड़ा, त्वचा कटने या संक्रमित जानवर की लार के संपर्क में आने पर डॉक्टर से तुरंत जांच कराएं। चिकित्सक घाव की स्थिति के अनुसार एंटी-रेबीज वैक्सीन और अन्य जरूरी उपचार तय करेंगे।
4. गहरे घाव में विशेष इंजेक्शन की जरूरत
गहरे काटने, त्वचा को भेदने वाले घाव या अन्य गंभीर संपर्क की स्थिति में डॉक्टर रेबीज इम्यूनोग्लोबुलिन देने की सलाह दे सकते हैं। यह संक्रमण से बचाव के लिए महत्वपूर्ण है।
कुत्ते को 10 दिन देखने के इंतजार में इलाज न टालें
कुत्ते के काटने के बाद कुछ लोग यह सोचकर इलाज नहीं कराते कि पहले कुत्ते को दस दिन तक देखेंगे। अगर वह बीमार हुआ, तभी वैक्सीन लगवाएंगे।
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसा करना खतरनाक हो सकता है। संभावित रेबीज संक्रमण के बाद इलाज शुरू करने में देरी नहीं करनी चाहिए।
कुत्ते की दस दिन तक निगरानी कुछ परिस्थितियों में चिकित्सकीय और पशु चिकित्सा मूल्यांकन का हिस्सा हो सकती है, लेकिन इसके इंतजार में जरूरी एंटी-रेबीज उपचार को टालना सही नहीं है।
आवारा कुत्तों का टीकाकरण क्यों जरूरी?
रेबीज की रोकथाम के लिए कुत्तों का नियमित टीकाकरण सबसे प्रभावी उपायों में शामिल है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, किसी क्षेत्र में कम से कम 70 प्रतिशत कुत्तों का रेबीज टीकाकरण करने से संक्रमण के प्रसार को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। इसके साथ ही स्थानीय प्रशासन की ओर से आवारा कुत्तों के टीकाकरण, नसबंदी और पशु नियंत्रण से संबंधित कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से लागू करना भी जरूरी है।
बालूमाथ की घटना ने बढ़ाई लोगों की चिंता
लातेहार के बालूमाथ में एक ही दिन में 16 लोगों के घायल होने की घटना ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। खासकर छोटे बच्चों और सड़क पर पैदल चलने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए आवारा कुत्तों के टीकाकरण के साथ आम लोगों को रेबीज के खतरों और समय पर उपचार के बारे में जागरूक करना जरूरी है।
जरूरी बात: कुत्ते के काटने या त्वचा टूटने वाली खरोंच को मामूली चोट समझकर नजरअंदाज न करें। तुरंत घाव धोएं और अस्पताल पहुंचकर डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार कराएं।










