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स्वच्छता में Lucknow की ऐतिहासिक छलांग, जीरो फ्रेश वेस्ट डंपिंग हासिल करने वाला देश का अग्रणी शहर

By Aditi Pandey

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Lucknow

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सोशल संवाद/डेस्क : Lucknow स्वच्छता मॉडल ने देशभर में शहरी प्रबंधन की दिशा में एक नया मानक स्थापित कर दिया है। उत्तर प्रदेश की राजधानी Lucknow अब ऐसा पहला शहर बन गया है, जहां ताजा कचरे की डंपिंग पूरी तरह समाप्त कर दी गई है। स्वच्छ भारत मिशन-शहरी के तहत लखनऊ नगर निगम ने नगरपालिका ठोस कचरे का 100 प्रतिशत वैज्ञानिक प्रसंस्करण सुनिश्चित कर स्वच्छता के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है।

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प्रतिदिन 2000 मीट्रिक टन कचरे का वैज्ञानिक निपटान

Lucknow शहर में प्रतिदिन लगभग 2,000 मीट्रिक टन कचरा उत्पन्न होता है। पहले यह कचरा खुले डंपिंग ग्राउंड में फेंक दिया जाता था, जिससे पर्यावरण, स्वास्थ्य और शहर की सुंदरता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता था। लेकिन अब यह पूरा कचरा वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस किया जा रहा है, जिससे किसी भी स्थान पर नया कचरा जमा नहीं हो रहा है।

शिवरी प्लांट बना स्वच्छता अभियान की रीढ़

शहर की इस सफलता में शिवरी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन संयंत्र की अहम भूमिका रही है। यहां हाल ही में 700 मीट्रिक टन प्रतिदिन क्षमता वाला नया यूनिट शुरू किया गया है। पहले से संचालित दो यूनिटों को मिलाकर अब कुल प्रोसेसिंग क्षमता 2,100 मीट्रिक टन प्रतिदिन से अधिक हो गई है। इससे यह सुनिश्चित हुआ है कि शहर में उत्पन्न होने वाला हर प्रकार का कचरा समय पर और सुरक्षित ढंग से निपटाया जाए।

घर-घर कचरा संग्रह और स्रोत पर पृथक्करण में सुधार

Lucknow नगर निगम ने घर-घर कचरा संग्रह व्यवस्था को मजबूत करते हुए 96 प्रतिशत से अधिक कवरेज हासिल कर ली है। इसके साथ ही गीले और सूखे कचरे को स्रोत पर अलग करने की प्रक्रिया भी प्रभावी हुई है। वर्तमान में 70 प्रतिशत से अधिक घरों में कचरे का पृथक्करण किया जा रहा है, जिससे प्रोसेसिंग प्रक्रिया और अधिक कारगर बन सकी है।

Lucknow मे कचरा बना संसाधन, बढ़ी हरित अर्थव्यवस्था

Lucknow में जैविक कचरे से उच्च गुणवत्ता की खाद और बायोगैस का उत्पादन किया जा रहा है। वहीं प्लास्टिक, कागज और धातु जैसे सूखे कचरे को रिसाइक्लिंग यूनिट्स में भेजा जा रहा है। कुछ कचरे को RDF (रिफ्यूज डेराइव्ड फ्यूल) में बदला जा रहा है, जिसका उपयोग सीमेंट फैक्ट्रियों और कागज मिलों में वैकल्पिक ईंधन के रूप में किया जा रहा है। इससे न केवल कचरे का बेहतर उपयोग हो रहा है, बल्कि कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आई है।

लीगेसी वेस्ट निपटान में भी बड़ी सफलता

Lucknow ने पुराने जमा कचरे यानी लीगेसी वेस्ट के निपटान में भी उल्लेखनीय प्रगति की है। कुल 18.5 लाख मीट्रिक टन पुराने कचरे में से लगभग 69 प्रतिशत का वैज्ञानिक निस्तारण पूरा किया जा चुका है। इससे RDF, जैव-मिट्टी, निर्माण सामग्री और रेत जैसे उपयोगी उत्पाद प्राप्त हुए हैं। शिवरी क्षेत्र में 25 एकड़ से अधिक भूमि अब पूरी तरह साफ हो चुकी है, जिसे भविष्य में पार्क, खेल मैदान और सार्वजनिक सुविधाओं के लिए विकसित किया जाएगा।

भविष्य की योजना: वेस्ट टू एनर्जी प्लांट

Lucknow नगर निगम भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 15 मेगावाट क्षमता का वेस्ट टू एनर्जी प्लांट स्थापित करने की तैयारी कर रहा है। यह प्लांट प्रतिदिन 1,000 से 1,200 टन RDF से बिजली उत्पादन करेगा। इससे कचरे के परिवहन की लागत घटेगी, प्रदूषण में कमी आएगी और नगर निगम के राजस्व में वृद्धि होगी।

देश के शहरों के लिए बना उदाहरण

Lucknow का यह स्वच्छता मॉडल चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) का उत्कृष्ट उदाहरण है, जहां कचरे को बोझ नहीं बल्कि संसाधन में बदला गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अन्य शहर भी इस मॉडल को अपनाएं, तो देशभर में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा मिल सकती है।

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