Lung Cancer: सिर्फ स्मोकिंग नहीं, इन वजहों से भी हो सकता है फेफड़ों का कैंसर; जानें Non-Smokers के Hidden Risk Factors

By Riya Kumari

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Lung Cancer: सिर्फ स्मोकिंग नहीं, इन वजहों से भी हो सकता है फेफड़ों का कैंसर; जानें Non-Smokers के Hidden Risk Factors

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सोशल संवाद / डेस्क : Lung Cancer यानी फेफड़ों का कैंसर लंबे समय से स्मोकिंग से जुड़ी बीमारी माना जाता रहा है। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। ऐसे लोगों में भी लंग कैंसर के मामले सामने आ रहे हैं, जिन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया। खासतौर पर युवा और महिलाओं में सामने आ रहे ऐसे मामलों ने विशेषज्ञों का ध्यान दूसरे जोखिम कारकों की ओर खींचा है।

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विशेषज्ञों के मुताबिक, फेफड़ों के कैंसर के पीछे सिर्फ तंबाकू का सेवन जिम्मेदार नहीं है। वायु प्रदूषण, घर के अंदर होने वाला धुआं, सेकेंड हैंड स्मोक, कुछ औद्योगिक रसायनों के संपर्क और आनुवंशिक कारण भी जोखिम बढ़ा सकते हैं।

क्या सिर्फ स्मोकिंग से होता है Lung Cancer?

नहीं। धूम्रपान लंग कैंसर का एक प्रमुख जोखिम कारक है, लेकिन इसे बीमारी का एकमात्र कारण नहीं माना जा सकता। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में भी ऐसे मरीज सामने आते हैं जिनका लंग कैंसर सीधे तौर पर स्मोकिंग से जुड़ा नहीं होता।

यही वजह है कि अगर कोई व्यक्ति स्मोकिंग नहीं करता है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि उसे लंग कैंसर का कोई खतरा नहीं है।

Non-Smokers में Lung Cancer के बड़े कारण

1. Air Pollution यानी वायु प्रदूषण

बढ़ता हुआ वायु प्रदूषण फेफड़ों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। महानगरों में रहने वाले लोग लंबे समय तक प्रदूषित हवा और बारीक कणों के संपर्क में रहते हैं। लगातार प्रदूषित हवा में सांस लेना फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है और लंग कैंसर के जोखिम में योगदान दे सकता है।

2. घर के अंदर का धुआं

घर में लकड़ी, कोयला या दूसरे बायोमास ईंधन से खाना पकाने के दौरान निकलने वाला धुआं भी फेफड़ों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। लंबे समय तक ऐसे धुएं के संपर्क में रहने वाली महिलाओं में यह जोखिम विशेष रूप से चिंता का विषय है।

3. Secondhand Smoke

अगर कोई व्यक्ति खुद सिगरेट नहीं पीता, लेकिन उसके आसपास लोग लगातार धूम्रपान करते हैं, तो वह भी तंबाकू के धुएं के संपर्क में आता है। इसे सेकेंड हैंड स्मोक कहा जाता है। लंबे समय तक इसका संपर्क फेफड़ों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है।

4. Workplace Exposure

कुछ लोगों को काम के दौरान ऐसे पदार्थों के संपर्क में रहना पड़ता है जो फेफड़ों के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। इनमें asbestos, silica, arsenic और chromium जैसे पदार्थ शामिल हैं। इसके अलावा diesel exhaust के लंबे समय तक संपर्क से भी बचने की सलाह दी जाती है।

5. Radon Gas

Radon एक रेडियोधर्मी गैस है जो कुछ स्थानों पर प्राकृतिक रूप से मौजूद हो सकती है। अगर किसी बंद जगह में इसका स्तर अधिक हो और व्यक्ति लंबे समय तक उसके संपर्क में रहे, तो यह लंग कैंसर के जोखिम से जुड़ा हो सकता है। विशेषज्ञ हाई-रैडॉन वाले स्थानों से बचने की सलाह देते हैं।

6. Genetic Factors

पर्यावरणीय कारणों के अलावा आनुवंशिक संवेदनशीलता भी महत्वपूर्ण हो सकती है। कुछ लोगों में मौजूद genetic changes या susceptibility बीमारी के जोखिम को प्रभावित कर सकती है। इसलिए कम उम्र में भी किसी ऐसे व्यक्ति में लंग कैंसर पाया जा सकता है जिसने कभी धूम्रपान नहीं किया हो।

Non-Smokers Lung Cancer से अपना बचाव कैसे करें?

लंग कैंसर के हर जोखिम को पूरी तरह खत्म करना संभव नहीं है, लेकिन कुछ सावधानियां जोखिम को कम करने में मदद कर सकती हैं।

  • सिगरेट के धुएं से दूरी बनाए रखें।
  • सेकेंड हैंड स्मोक से बचें।
  • ज्यादा प्रदूषण वाले वातावरण में लंबे समय तक रहने से बचें।
  • घर के अंदर धुएं को कम करने के लिए उचित ventilation रखें।
  • काम की जगह पर asbestos, silica और अन्य हानिकारक पदार्थों से सुरक्षा के लिए जरूरी सावधानियां अपनाएं।
  • diesel exhaust के लंबे समय तक संपर्क से बचने की कोशिश करें।
  • हाई-radon वाले स्थानों के बारे में जानकारी रखें और जरूरी सुरक्षा उपाय अपनाएं।
  • लगातार या असामान्य स्वास्थ्य संबंधी लक्षण होने पर डॉक्टर से सलाह लें।

महिलाओं और युवाओं में भी क्यों जरूरी है सावधानी?

लंग कैंसर के मामलों में बदलते पैटर्न ने महिलाओं और कम उम्र के लोगों पर भी ध्यान देने की जरूरत बढ़ा दी है। विशेषज्ञों ने ऐसे युवा non-smokers में भी मामले देखे हैं जिन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया। इसलिए केवल इस आधार पर लंग कैंसर के खतरे को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए कि व्यक्ति smoker नहीं है।

Lung Cancer को सिर्फ smokers की बीमारी मानना सही नहीं है। वायु प्रदूषण, indoor biomass smoke, secondhand smoke, workplace exposure, radon और genetic susceptibility जैसे कई दूसरे कारक भी जोखिम बढ़ा सकते हैं। इसलिए non-smokers को भी अपने आसपास के पर्यावरण और संभावित जोखिमों को लेकर जागरूक रहना जरूरी है।

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