सोशल संवाद / डेस्क : मद्रास हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि हिंदू परंपरा में पति के जीवित रहते पत्नी द्वारा मंगलसूत्र (दक्षिण भारत में थाली) उतारना मानसिक क्रूरता के रूप में देखा जा सकता है। अदालत ने यह टिप्पणी एक वैवाहिक विवाद से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान की और निचली अदालत द्वारा दिए गए तलाक के आदेश को बरकरार रखा।

यह भी पढ़े : Fuel Consumption Report: मई 2026 में LPG बिक्री 24% घटी, पेट्रोल-डीजल की मांग में जोरदार बढ़ोतरी
जस्टिस पी. वडामलाई की एकल पीठ ने कहा कि विवाह के प्रतीक के रूप में पहनी जाने वाली थाली का हटाया जाना पति की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचा सकता है और इसे मानसिक क्रूरता के रूप में माना जा सकता है।
क्या कहा हाई कोर्ट ने?
सुनवाई के दौरान अदालत ने एक पूर्व डिवीजन बेंच के फैसले का उल्लेख किया, जिसमें कहा गया था कि हिंदू समाज में विवाहित महिला द्वारा पति के जीवित रहते थाली को न उतारना एक स्थापित सामाजिक परंपरा है। थाली वैवाहिक संबंधों और पति की दीर्घायु का प्रतीक मानी जाती है।
अदालत ने कहा कि पत्नी द्वारा स्वयं यह स्वीकार किया गया कि उसने अपना मंगलसूत्र उतार दिया था। न्यायालय ने यह भी माना कि पति के इस आरोप को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता कि पत्नी ने ईसाई धर्म अपना लिया था।
अधिकारियों को शिकायत भेजना भी माना गया मानसिक क्रूरता
मद्रास हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि पत्नी द्वारा पति के वरिष्ठ अधिकारियों को उसके खिलाफ शिकायतें भेजना मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आ सकता है। अदालत के अनुसार, इन परिस्थितियों को देखते हुए पति क्रूरता साबित करने में सफल रहा। इसी आधार पर हाई कोर्ट ने निचली अदालत और फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वारा दिए गए तलाक के फैसले को सही ठहराते हुए यथावत रखा।
क्या है पूरा मामला?
मामला एक सेवानिवृत्त सेना कर्मी और उनकी पत्नी से जुड़ा है, जिनकी शादी वर्ष 1977 में हुई थी। दंपति के एक पुत्र और एक पुत्री हैं। पति ने अदालत में दावा किया कि शादी के शुरुआती दिनों से ही पत्नी लगातार उस पर अवैध संबंधों के आरोप लगाती थी और सार्वजनिक रूप से उसका अपमान करती थी। उसके अनुसार, पत्नी ने सेना के वरिष्ठ अधिकारियों को कई शिकायतें भेजीं और उसके खिलाफ पुलिस में मामला भी दर्ज कराया था।
पति ने यह भी आरोप लगाया कि पत्नी ने ईसाई धर्म अपना लिया था और उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। उसका कहना था कि पत्नी उसे छोड़कर अलग रहने लगी थी और अब वैवाहिक संबंधों को सामान्य रूप से बहाल करने की कोई संभावना नहीं बची थी।
पत्नी ने लगाए गंभीर आरोप
वहीं पत्नी ने पति पर दूसरी महिलाओं के साथ संबंध रखने का आरोप लगाया। उसने दावा किया कि जब उसने इस बारे में सवाल किया, तो पति ने उसे और बच्चों को घर में बंद कर दिया और आग लगाने की कोशिश की। पत्नी ने यह भी आरोप लगाया कि पति दूसरी महिला के साथ रह रहा था और उससे दूसरी शादी की अनुमति मांग रहा था। पत्नी के अनुसार, जब उसने इसका विरोध किया तो पति ने उस पर हिंसा की।
रिपोर्ट के अनुसार, पत्नी ने यह भी आरोप लगाया कि पति ने उसका दाहिना अंगूठा काट दिया था, जिसके बाद उनके बेटे ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। इस मामले में पति को सजा भी हुई थी, जिसे बाद में अपील के दौरान कम कर दिया गया।
निचली अदालत से हाई कोर्ट तक पहुंचा मामला
पति ने वैवाहिक क्रूरता के आधार पर तलाक की याचिका दायर की थी, जिसे निचली अदालत ने स्वीकार कर लिया। इसके बाद पत्नी ने अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय (फास्ट ट्रैक कोर्ट) में अपील की, लेकिन वहां भी तलाक का फैसला बरकरार रखा गया। अंततः पत्नी ने मद्रास हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहां अदालत ने सभी तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करने के बाद निचली अदालतों के फैसले को सही माना और तलाक के आदेश को बरकरार रखा।
निष्कर्ष
मद्रास हाई कोर्ट का यह फैसला वैवाहिक विवादों में मानसिक क्रूरता की व्याख्या को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि वैवाहिक प्रतीकों, सामाजिक परंपराओं और दोनों पक्षों के व्यवहार को भी ऐसे मामलों में महत्वपूर्ण कारक माना जा सकता है।









