सोशल संवाद / डेस्क : झारखंड में JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर शुरू हुआ छात्र आंदोलन 26 दिनों तक चला। सरकार की ओर से कई अहम फैसले लिए जाने के बाद आंदोलन को फिलहाल खत्म कर दिया गया है, लेकिन CBI जांच की मांग अब भी इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा बनी हुई है।
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क्या थीं छात्रों की प्रमुख मांगें?
छात्रों और नौकरी के अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगों में JSSC-CGL समेत विवादित भर्ती परीक्षाओं को रद्द करना, कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच और CBI जांच शामिल थी। इसके अलावा JPSC और JSSC की भर्ती प्रक्रिया में व्यापक सुधार की मांग भी उठाई गई।
छात्रों का आरोप था कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता की कमी और कथित गड़बड़ियों के कारण हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य पर असर पड़ रहा है। आंदोलन के दौरान छात्रों ने रांची में धरना, भूख हड़ताल और तिरंगा यात्रा जैसे कार्यक्रम भी किए।
सरकार ने क्या फैसला लिया?
लगातार विरोध के बीच झारखंड सरकार ने JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया। इसके साथ ही एक निजी एजेंसी TDPL द्वारा कराई गई अन्य भर्ती परीक्षाओं को भी रद्द करने की घोषणा की गई। सरकार ने कुल 44 भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने की सूची जारी की।
सरकार ने भर्ती व्यवस्था में सुधार के लिए तीन सदस्यीय हाईलेवल कमेटी भी बनाई है। कमेटी JPSC और JSSC की भर्ती प्रक्रिया और नियुक्ति व्यवस्था में सुधार को लेकर सुझाव देगी।
फिर मामला कहां फंसा है?
सबसे बड़ा सवाल CBI जांच को लेकर है। सरकार की ओर से परीक्षाएं रद्द करने और जांच के फैसले के बावजूद छात्रों की मांग है कि पूरे मामले की जांच CBI से कराई जाए। यही मुद्दा आंदोलन के दौरान सरकार और छात्रों के बीच टकराव की सबसे बड़ी वजह रहा।
छात्रों को सरकार के फैसलों के बाद जांच के लिए 60 दिन का समय देने की बात सामने आई है। हालांकि, CBI जांच को लेकर स्थिति अभी भी पूरी तरह साफ नहीं हुई है।
अदालत में भी पहुंचा मामला
JPSC परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। कोर्ट ने CBI या स्वतंत्र जांच की मांग वाली याचिका पर केंद्र और झारखंड सरकार समेत संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। इससे अब इस विवाद का एक अहम हिस्सा न्यायिक प्रक्रिया में भी पहुंच गया है।
अब आगे क्या?
फिलहाल सड़क पर चल रहा बड़ा छात्र आंदोलन समाप्त हो चुका है, लेकिन विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। सरकार की ओर से रद्द की गई परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रिया में सुधार के फैसलों के साथ-साथ अब सबकी नजर जांच की दिशा और CBI जांच की मांग पर है।
वहीं, जिन अभ्यर्थियों की नियुक्तियां रद्द की गई परीक्षाओं के आधार पर हुई हैं, उनके भविष्य को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार के फैसले, जांच की प्रगति और अदालत की कार्यवाही इस पूरे मामले की दिशा तय करेगी।









