सोशल संवाद/डेस्क : झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान को बड़ी सफलता मिली है। राज्य सरकार की ‘नई दिशा-नई पहल’ और ‘ऑपरेशन नवजीवन-2’ के तहत 15 लाख रुपये के इनामी रीजनल कमांडर सहित 16 नक्सलियों ने हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण कर दिया। आत्मसमर्पण करने वालों ने पुलिस के सामने 11 हथियार और 1,562 जिंदा कारतूस भी जमा किए।
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सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह सिर्फ आत्मसमर्पण नहीं, बल्कि झारखंड में कमजोर पड़ रहे नक्सली नेटवर्क का संकेत भी है। अधिकारियों के अनुसार, इस कार्रवाई से प्रतिबंधित माओवादी संगठन की गतिविधियों पर असर पड़ सकता है।
सरकार की नई रणनीति का दिख रहा असर
पिछले कुछ समय से झारखंड सरकार नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में ‘नई दिशा-नई पहल’ और ‘ऑपरेशन नवजीवन-2’ के तहत लगातार काम कर रही है। इन अभियानों का उद्देश्य सिर्फ नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई करना नहीं, बल्कि उन्हें हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन जीने का अवसर देना भी है। सरकार का दावा है कि पुनर्वास योजनाओं, रोजगार के अवसरों और विकास कार्यों का असर अब जमीन पर दिखाई देने लगा है। इसी का परिणाम है कि कई नक्सली संगठन छोड़कर मुख्यधारा में लौट रहे हैं।
पुलिस को सौंपे हथियार और कारतूस
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों ने पुलिस के सामने 11 हथियार और 1,562 कारतूस जमा किए। सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि इससे नक्सली संगठन की हथियारबंद क्षमता कमजोर होगी और प्रभावित इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने में मदद मिलेगी।
मिसिर बेसरा के नेटवर्क पर बढ़ा दबाव
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वालों में एक 15 लाख रुपये का इनामी रीजनल कमांडर भी शामिल है। माना जा रहा है कि इससे शीर्ष माओवादी नेता मिसिर बेसरा के नेटवर्क पर दबाव बढ़ेगा। संगठन के भीतर सक्रिय कैडरों के लगातार सरेंडर करने से उसकी पकड़ कमजोर पड़ सकती है।
बदल रही है नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की तस्वीर
एक समय जिन इलाकों में नक्सलियों का प्रभाव ज्यादा था, वहां अब सुरक्षा अभियान के साथ-साथ सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी सुविधाओं पर भी तेजी से काम हो रहा है। अधिकारियों का कहना है कि विकास और सुरक्षा की इस दोहरी रणनीति का सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है।
सरकार का संदेश
राज्य सरकार ने एक बार फिर अपील की है कि जो भी नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, उन्हें पुनर्वास नीति के तहत हर संभव सहायता दी जाएगी। वहीं, हिंसक गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ सुरक्षा बलों का अभियान पहले की तरह जारी रहेगा। इस सामूहिक आत्मसमर्पण को झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ चल रही लड़ाई में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों को उम्मीद है कि आने वाले समय में और भी नक्सली हथियार छोड़कर सामान्य जीवन की ओर लौट सकते हैं।









