सोशल संवाद/डेस्क: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee एक बार फिर आंदोलन के मोड में नजर आईं। राज्य में SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने के मुद्दे पर उन्होंने धरना शुरू कर दिया और Election Commission of India तथा Bharatiya Janata Party पर गंभीर आरोप लगाए।

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कोलकाता के एस्प्लेनेड इलाके में हुए इस विरोध प्रदर्शन में ममता बनर्जी ने कहा कि बंगाली मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने दावा किया कि कई ऐसे लोगों को भी मृत घोषित कर दिया गया है जो अभी जीवित हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे लोगों को मंच पर लाकर सच्चाई सामने रखी जाएगी।
धरने में तृणमूल कांग्रेस के कई मंत्री, विधायक और हजारों समर्थक मौजूद रहे। पार्टी नेताओं का आरोप है कि संशोधित मतदाता सूची में बड़ी संख्या में नामों को “विचाराधीन” रखा गया है, जिससे लाखों मतदाताओं के वोट देने के अधिकार पर असर पड़ सकता है।
इस मुद्दे पर Abhishek Banerjee ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर 24 परगना जैसे जिलों में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नामों को समीक्षा के दायरे में रखा गया है। वहीं विपक्षी भाजपा नेताओं ने ममता के धरने पर निशाना साधते हुए कहा कि यह पूरी तरह राजनीतिक कदम है।
ममता बनर्जी का यह कदम इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि करीब दो दशक बाद वह फिर से सड़क पर आंदोलन करती नजर आई हैं। इससे पहले 2006 में सिंगूर भूमि अधिग्रहण के खिलाफ उनके लंबे आंदोलन ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को नई दिशा दी थी। अब SIR विवाद को लेकर शुरू हुआ यह धरना राज्य की सियासत में नया टकराव खड़ा करता दिख रहा है।









