सोशल संवाद / जमशेदपुर : 13 फरवरी, 2026 को भारतीय जननाट्य संघ,जमशेदपुर ने फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ के 115 वें जन्मदिन का आयोजन किया। जैसा कि इप्टा की रवायत रही है कि गीतों से किसी कार्यक्रम का आगाज़ किया जाता है तो लिटिल इप्टा के साथियों ने फ़ैज़ का ‘ऐ वतन,ऐ वतन’ प्रस्तुत किया । विषय प्रवेश किया कॉमरेड शशि ने किया। इसके बाद शायर और जमशेदपुर इप्टा के अध्यक्ष अहमद बद्र ने फ़ैज़ के जेल के अनुभवों से परिचित कराया। साथी रमन ने फ़ैज़ की नज़्म ‘यह फ़स्ल उमीदो की हमदम’ प्रस्तुत की जो फ़ैज़ ने मॉन्टगोमरी जेल में रहते हुए लिखी थी।
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कवि और जसम के साथी सुधीर सुमन ने फ़ैज़ के इंकलाबी तेवर को उनकी कुछ नज़्मों के साथ आज के समय को जोड़कर अपनी बात रखी। इस आयोजन की ख़ास बात रही फ़ैज़ को याद करने के लिए हमारे साथ शामिल हुए शायर असर भागलपुरी और कवि वरुण प्रभात जिन्होंने अपनी रचना के माध्यम से फ़ैज़ को याद किया। कार्यक्रम के अंत में फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ का पंजाबी तराना ‘एक किसान के नाम’ लिटिल इप्टा के साथियों ने प्रस्तुत किया।

इस आयोजन की दो महत्वपूर्ण उपलबधि रही कि हम एक साथ दो पीढ़ी के साथियों की पहली धुन को सुन रहे थे जिसमें शामिल हैं युवा साथी रमन जिन्होंने ‘ये फ़स्ल उमीदो की हमदम’ और किशोर साथी वर्षा ने ‘एक किसान के नाम’ की धुन बनाई। पूरे आयोजन को साथी संजय सोलोमन ने संचालित करते हुए फ़ैज़ के उन पहलुओं पर रौशनी डाली जो आयोजन में उपस्थित नए साथियों के लिए फ़ैज़ को जानने की ख़्वाहिश दी होगी।

इस आयोजन में शामिल रहे कौमी एकता मंच,जनवादी लेखक संघ, सर्वोदय संघ,दाबिस्तान ए जमशेदपुर, प्रगतिशील लेखक संघ जमशेदपुर व घाटशिला इकाई,ए आई एस एफ,साझा नागरिक मंच, जसम,ढाई आखर प्रेम के साथियों ने शामिल होकर इस आयोजन को सफल बनाया। धन्यवाद ज्ञापन अर्पिता ने दिया।










