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एक अनसुलझी थ्रिलर – मोदी की बधाइयाँ और सुनिता की खामोशी

By Riya Kumari

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Modi's congratulations and Sunita's silence
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सोशल संवाद / डेस्क (सिद्धार्थ प्रकाश) : एक अंतरिक्ष यात्री, जिसने अंतरिक्ष में उड़ान भरी लेकिन गुजरात की मिट्टी को कभी नहीं भूला।एक नेता, जिसे सवाल पूछने की कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। और एक प्रधानमंत्री, जिसकी बधाई को सुनिता ने कभी स्वीकार नहीं किया।

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सुनिता विलियम्स – वो महिला जिसने अंतरिक्ष में झंडे गाड़े, रिकॉर्ड तोड़े और दुनिया को चौंका दिया। लेकिन जब वो जीरो ग्रैविटी में तैर रही थी, तब भी गुजरात की एक पुरानी कहानी का गुरुत्वाकर्षण उसे खींच रहा था।

हरेंद्र पांड्या – गुजरात के पूर्व गृह मंत्री, जिनकी 2003 में दिनदहाड़े हत्या कर दी गई। वो एक बाग़ी नेता थे, अपनी अलग सोच और बेबाकी के लिए मशहूर। लेकिन सत्ता की दुनिया में जो सवाल ज़्यादा पूछता है, उसका जवाब अक्सर गोलियों से दिया जाता है।

सत्य वही जो सामने दिखे, या वो जो शून्य में छिपा हो? शायद एक दिन कोई गुजरात के इतिहास का ब्लैक बॉक्स खोलकर सच बाहर लाएगा। तब तक, सुनिता विलियम्स अंतरिक्ष में उड़ती रहेंगी, और कुछ सच्चाइयाँ धरती के गर्त में दबी रहेंगी।

जब भी सुनिता अंतरिक्ष से लौटतीं, दुनिया के बड़े-बड़े नेता उन्हें बधाई देते। लेकिन जब नरेंद्र मोदी की तरफ़ से शुभकामनाएँ आतीं, तो सुनिता कभी जवाब नहीं देतीं। बस एक “थैंक यू” बोलने में क्या जाता? लेकिन ख़ामोशी की गूंज कभी-कभी शब्दों से ज़्यादा तेज़ होती है।

संयोग? शायद नहीं। 2003 में जब पांड्या मारे गए, मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। सुनिता की चुप्पी कोई सीधा आरोप नहीं थी, लेकिन एक मूक विरोध ज़रूर था—जैसे अंतरिक्ष में भेजा गया एक सिग्नल, जिसे कोई पकड़ने की कोशिश करे, मगर वो हमेशा डार्क स्पेस में गुम हो जाए।

सुनिता विलियम्स के पिता दीपक पांड्या गुजरात के कच्छी पाटीदार समुदाय से थे – वही समुदाय जिससे हरेंद्र पांड्या आते थे। दोनों परिवारों के बीच न सिर्फ़ जड़ें जुड़ी थीं, बल्कि शायद विचार भी।

जब हरेंद्र पांड्या को रहस्यमयी तरीक़े से मार गिराया गया, तब भी कई उंगलियाँ एक ही दिशा में उठी थीं। लेकिन जिसने भी ज़्यादा बोला, उसकी आवाज़ इतिहास के शोर में खो गई। यहाँ तक कि सुप्रीम कोर्ट ने भी जांच पर सवाल उठाए थे।

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