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मेरे लोग अभी बच्चे हैं; जमशेदपुर में राष्ट्रपति ने आदिवासियों के विकास के लिए दिए मंत्र

By Riya Kumari

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मेरे लोग अभी बच्चे हैं; जमशेदपुर में राष्ट्रपति ने आदिवासियों के विकास के लिए दिए मंत्र
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सोशल संवाद / जमशेदपुर : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इस समय झारखंड के दौरे पर हैं। जमशेदपुर के करनडीह पहुंचीं राष्ट्रपति ओलचिकी के शताब्दी समारोह में हिस्सा लिया। मुर्मू ने कहा कि ओलचिकी को जन जन तक पहुंचाने के लिए दीवार पर संताली लिपि में कलाकृतियां बनाएं।

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उन्होंने कहा कि ओलचिकी के विस्तार और उत्थान में मेरा भी छोटा सा योगदान रहा है। अपने बच्चों को अपनी मातृभाषा अवश्य सिखायें। एकजुट होकर इसे और समृद्ध बनाने में योगदान दें। सिर्फ संताली ही नहीं हो, मुंडा, समेत सभी का उत्थान करना है। इसके लिए जो आगे रहेगा उन्हें पीछे रह गए भाषा को साथ खींच कर आगे ले आना है।

उनके कपड़े नहीं हैं और हम मना रहें अमृतकाल

राष्ट्रपति ने कहा कि देश के 75 पीवीटी ट्राइबल (पर्टिक्यूलरली वुलरेनेबल ट्राइबल ग्रुप) अभी भी पेड़ में रहते हैं। उनके घर नहीं हैं। उनके कपड़े नहीं हैं और हम लोग अमृतकाल वर्ष मना रहे हैं। आखिरकार सरकार ने बात सुनी और बिरहोड समेत सभी आदिवासी के लिए 24 हजार करोड़ से उनके विकास को काम करने का मिशन शुरू किया। उन्होंने कहा कि ये आदिवासी नहीं जानते कि पीएम आवास बन रहे हैं। ये लोग यह भी नहीं जानते कि सीमेंट कहां से आएगा, घर कैसे बनेगा। इसलिए उन्हें घर बनाकर देना होगा।

इन्हें पैसे का इस्तेमाल करना नहीं आता

राष्ट्रपति ने कहा आदिवासी अभी भी बच्चे हैं। इन्हें पैसे का इस्तेमाल करना नहीं आता। इसलिए उन्हें पैसे नहीं दें। इन्हें घर बनाकर दें। राष्ट्रपति ने कहा लेकिन हमें भी सीखना होगा। हमारे माता पिता भी हमेशा हमारा हाथ पकड़कर नहीं चलते। हमें खुद भी प्रयास करना होगा। दूसरों को देख कर चलना होगा। पहले जब मैं राजनीति में नहीं थी, तो मां से पूछा तो उन्होंने कहा बताया कि शिक्षा कितना जरूरी है, लेकिन इससे हम हमारे गांव घर से अलग हो गए, लेकिन समय निकाल कर हमें अपने गांव अपने भाई बहनों का हाल चाल लेना है। हमें कम से कम दो लोगों को विकसि करना है।

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि हमें क्षमता के हिसाब से गांव को गोद लेना है। ताकि जो पीछे रह गए उन्हें अपने साथ खड़े कर सकें। उन्होंने कारणडीह में महिलाओं को आगे मौका दिए जाने पर सराहना की। उन्होंने कहा कि महिलाओं को आगे बढ़ाने पर वे अपना रास्ता खोज लेंगी। मुझे खुशी है कि हमारे लोग अब आगे बढ़ते दिख रहे हैं। उन्होंने अपील की कि संतालों के विकास को हमें खुद प्रयास करना होगा।

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