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नामकोम-कांड्रा रेल लाइन बनेगी, टाटा-रांची का सफर ढाई घंटे का होगा

By Riya Kumari

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नामकोम-कांड्रा रेल लाइन बनेगी, टाटा-रांची का सफर ढाई घंटे का होगा

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सोशल संवाद / जमशेदपुर : रेलवे की महत्वाकांक्षी नामकोम-कांड्रा नई रेल लाइन परियोजना का डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार हो गया है और वर्तमान में उसकी जांच प्रक्रिया चल रही है। रांची रेल मंडल ने डीपीआर बनवाया है। डीपीआर के अनुसार, यह नई रेल लाइन लगभग 113 किलोमीटर लंबी होगी। इससे टाटानगर से रांची जाना आसान हो जाएगा।

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इस परियोजना के पूरा होने के बाद नामकोम से कांड्रा के रास्ते सीधे जमशेदपुर पहुंचना संभव हो जाएगा। परियोजना की लागत करीब 3500 करोड़ रुपए है। अभी टाटानगर से रांची जाने वाली ट्रेनों को मूरी होकर गुजरना पड़ता है, जिससे 171 किलोमीटर की यात्रा में चार घंटे लग जाते हैं। नई रेल लाइन बनने के बाद मुरी होकर जाने की आवश्यकता नहीं रहेगी और यात्रा समय घटकर करीब ढाई घंटे रह जाएगा। उप मुख्य अभियंता (निर्माण) एनके मीणा ने बताया कि प्रस्तावित नामकोम-कांड्रा रेल लाइन पर बानपुर, रामताला, बुंडू, तमाड़, चिरुडीह और पालना स्टेशन बनाने का प्रस्ताव है। रेल लाइन की डीपीआर तैयार होने के बाद जांच प्रक्रिया में है।

टाटा से रांची की दूरी 33 किमी. कम हो जाएगी

नई रेल लाइन परियोजना पूरी होने के बाद रांची और टाटानगर के बीच रेल संपर्क अधिक सुगम हो जाएगा। प्रस्तावित रेल लाइन की लंबाई नामकोम से कांड्रा तक 113 किलोमीटर होगी, जबकि कांड़ा से टाटानगर की दूरी करीब 21 किलोमीटर है। इस प्रकार नई लाइन के जरिए रांची से टाटानगर की कुल दूरी लगभग 138 किलोमीटर रह जाएगी। दूरी कम होने से यात्रा समय मैं कमी आएगी और यात्रियों को तेज एवं सुविधाजनक रेल सेवा का लाभ मिलेगा।

औद्योगिक विकास के लिए भी अहम है यह रेल लाइन

रांची और जमशेदपुर के बीच रेल संपर्क और बेहतर होगा तथा यात्रियों के यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी। नई रेल लाइन से दोनों प्रमुख शहरों के बीच आवागमन अधिक सुगम और तेज होगा। इसके साथ ही यह परियोजना क्षेत्र के औद्योगिक और आर्थिक विकास को भी नई गति देगी। बेहतर रेल संपर्क से माल परिवहन सुविधा होगी, जिससे उद्योगों को लाभ मिलेग की संभावनाएं बढ़ेंगी।

पहाड़ काटकर 6 टनल भी बनाए जाएंगेः परियोजना के तहत कई पहाड़ों को काटकर सुरंग (टनल) बनाई जाएंगी। इस रेल मार्ग पर कुल छह टनल के निर्माण का प्रस्ताव है। रेल लाइन के निर्माण में आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों का उपयोग किया जाएगा।

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