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माँ दुर्गा के इस मंदिर की शक्तियों से NASA भी है हैरान, स्वामी विवेकानंद ने भी की है यहाँ तपस्या

By admin

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सोशल संवाद / डेस्क (रिपोर्ट  :तमिश्री )- उत्तराखंड में आपको कई मंदिर दिख जाएंगे, जिनका अपना महत्व है, लेकिन अल्मोड़ा के कसार देवी का एक अलग ही ऐतिहासिक महत्व है। इस मंदिर में स्वामी विवेकानंद जी ने तपस्या की थी और कई सिद्ध पुरुषो ने भी।जी हां, ये मंदिर अपने चुंबकीय प्रभाव के लिए मशहूर है,जिसके बारे में जानने के लिए अक्सर यहां वैज्ञानिक भी आते रहते हैं। माना जाता है कि इस चमत्कार के बारे में आजतक कोई भी पता नहीं लगा पाया है। चलिए आज हम आपको कसर मंदिर के बारे में बताते हैं।

कसार देवी वो जगह है, जहां स्वामी विवेकानंद भी आए थे, यहां उन्होंने ध्यान किया था, तब से ये जगह और मंदिर हर तरह के यात्रियों के बीच फेमस हो चुकी है। स्वामी विवेकानंद को ये जगह इतनी पसंद आई थी कि उन्होंने अपने लेखन में इसका जिक्र भी किया था। कसार देवी का मंदिर लोगों में इतनी लोकप्रिय हुई कि यहां बॉब डायलन, जॉर्ज हैरिसन, कैट स्टीवंस, एलन गिन्सबर्ग और टिमोथी लेरी जैसे कुछ प्रसिद्ध व्यक्ति भी आए थे। 70 के दशक में हिप्पी संस्कृति के दशक में ये जगह हिप्पी हिल बन गई थी।
कसार देवी मंदिर भारत की देवभूमि के नाम से फेमस उत्तराखंड की अल्मोड़ा पहाड़ियों पर स्थित है।

मंदिर के बारे में माना जाता है कि यहां देवी मां साक्षात अवतार में आई थीं। कहते हैं कि भारत की ये एक एकलौती ऐसी जगह है, जहां चुंबकीय शक्तियां मौजूद है.आपको बता दें, कसार देवी मंदिर के आसपास का क्षेत्र वैन एलेन बेल्ट है।यानि मंदिर के आसपास कई जगह हैं, जहां धरती के अंदर बड़े-बड़े भू-चुंबकीय पिंड हैं। इस मंदिर से कई शक्तियां जुड़ी हुई हैं, जिसका पता लगाने के लिए यहां नासा के वैज्ञानिक भी आए हैं, लेकिन आखिर में वो खाली हाथ ही लौटे । वैज्ञानिकों के द्वारा किए गए शोध के मुताबिक, अल्मोड़ा के इस मंदिर और दक्षिण अमेरिका के पेरू स्थित माचू-पिच्चू और इंग्लैंड के स्टोन हेंग में ऐसी ही अनोखी और अद्भुत चमत्कारिक समानताएं पाई गई हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस कारण ही इस जगह को अद्वितीय और चुंबकीय शक्ति का केंद्र माना जाता है, जहां मानसिक शांति का अनुभव किया जा सकता है। कसार देवी मंदिर परिसर में जी पी एस 8 केंद्र चिह्नित किया गया है, इस संबंध में अमेरिका की संस्था नासा ने ग्रेविटी पॉइंट( चुंबकीय केंद्र) के बारे में बताया है। मुख्य मंदिर के द्वार के बाईं ओर नासा के द्वारा यह स्थान चिह्नित करने के बाद ही GPS 8 लिखा गया है।

इस मंदिर में हर साल कार्तिक पूर्णिमा के दौरान कसार मेला लगाया जाता है, जहां हजारों-लाखों लोग शरीख होते हैं। इस स्थान पर मानसिक शनि की अनुभूति होती है।

इस मंदिर का निर्माण लगभग दूसरी शताब्दी में किया गया था। इस मंदिर की संरचना बेहद सरल और खूबसूरत है, जो पहाड़ों के बीच में बना हुआ है। यहां से कई खूबसूरत दृश्य और सौंदर्य देखने को मिलते हैं। इस मंदिर में माता रानी की मूर्ति बनी हुई है। साथ ही, मंदिर में रखी माता की मूर्ति के पीछे पत्थर पर एक शेर की आकृति भी बनी हुई है। यह मंदिर शक्तियों से समृद्ध है, जहां लोगों को शांति का आभास होता है। बता दें कि कसार देवी उत्तराखंड में अल्मोड़ा के पास बना एक छोटा-सा गांव है जो की कसार देवी मंदिर की वजह से काफी प्रसिद्ध है। हालांकि, यह अल्मोड़ा से लगभग 8 किलोमीटर की दूरी पर बसा है। यह अल्मोड़ा-बागेश्वर हाईवे के पास ही है आप यहां से आसानी से मंदिर के दर्शन करने के लिए जा सकते हैं।

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