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बिहार राज्यसभा चुनाव में NDA का क्लीन स्वीप, 5 सीट जीतकर बदले सियासी समीकरण

By Muskan Thakur

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सोशल संवाद/डेस्क : बिहार की सियासत में हालिया राज्यसभा चुनाव ने बड़ा उलटफेर कर दिया है। इस चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी NDA ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सभी पांचों सीटों पर जीत दर्ज की है। इस क्लीन स्वीप ने राज्य के राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है और महागठबंधन के लिए गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है।

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चुनाव से पहले माना जा रहा था कि मुकाबला कड़ा होगा और दोनों पक्षों के बीच सीटों का बंटवारा हो सकता है। महागठबंधन को उम्मीद थी कि उनके पास पर्याप्त समर्थन है, लेकिन मतदान के दिन हालात पूरी तरह बदल गए। चार विधायकों की अनुपस्थिति ने उनके समीकरण को बिगाड़ दिया और इसका सीधा फायदा NDA को मिला।

मतदान के दौरान कांग्रेस और राजद के कुछ विधायक सदन में मौजूद नहीं रहे। इनमें वाल्मिकीनगर, फारबिसगंज, मनिहारी और ढाका के विधायक शामिल बताए जा रहे हैं। इनकी गैरमौजूदगी ने महागठबंधन की रणनीति को कमजोर कर दिया, जिससे NDA ने पांचवीं सीट भी अपने नाम कर ली। यह सीट पहले मुकाबले की मानी जा रही थी, लेकिन अंत में परिणाम एकतरफा रहा।

वोटों की गिनती में भी NDA के उम्मीदवारों को बढ़त मिलती नजर आई। प्रमुख उम्मीदवारों को 40 से अधिक वोट मिले, जबकि महागठबंधन के उम्मीदवार पीछे रह गए। इस अंतर ने साफ कर दिया कि चुनाव में NDA की रणनीति और संगठनात्मक मजबूती काम आई।

इस जीत के साथ ही मुख्यमंत्री Nitish Kumar की राजनीतिक स्थिति और मजबूत हुई है। उनके नेतृत्व में NDA ने एक बार फिर साबित किया कि वह राज्य की राजनीति में मजबूत पकड़ बनाए हुए है। दूसरी ओर, महागठबंधन के लिए यह परिणाम एक बड़ा झटका है, जिसने उनके अंदरूनी समीकरणों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

हालांकि, इस नतीजे के बाद विवाद भी शुरू हो गया है। राजद और अन्य विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि उनके विधायकों को प्रभावित करने की कोशिश की गई। कुछ नेताओं ने यह भी दावा किया कि विधायकों को दबाव में रखा गया या उन्हें मतदान से दूर रखा गया। इन आरोपों ने चुनाव के बाद राजनीतिक माहौल को और भी गरमा दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि राज्यसभा चुनाव में हर वोट की अहमियत होती है और विधायकों की अनुपस्थिति सीधे परिणाम को प्रभावित करती है। इस बार भी यही देखने को मिला, जहां कुछ वोटों के अंतर ने पूरी तस्वीर बदल दी।

इस चुनाव के नतीजे आने वाले समय में बिहार की राजनीति को नई दिशा दे सकते हैं। NDA के लिए यह जीत आत्मविश्वास बढ़ाने वाली है, वहीं महागठबंधन के लिए यह आत्ममंथन का समय है। आने वाले चुनावों में इसका असर साफ तौर पर देखने को मिल सकता है।

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