सोशल संवाद / जमशेदपुर : अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस के अवसर पर टाटा स्टील फाउंडेशन के दिव्यांग समावेशन कार्यक्रम सबल (SABAL) ने साकची स्थित सबल सेंटर में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया। महीने भर चल रहे अभियान के तहत आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय सांकेतिक भाषा (ISL) के प्रति जागरूकता बढ़ाना, बधिर समुदाय की आवाज को मजबूत करना और संवाद को अधिक सुलभ बनाना रहा।
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कार्यक्रम में बधिर समुदाय के सदस्यों के अलावा शैक्षणिक संस्थानों, सिविल सोसाइटी संगठनों, नियोक्ताओं, विद्यार्थियों, खेल क्षेत्र से जुड़े उपलब्धि हासिल करने वालों, मीडिया प्रतिनिधियों और दिव्यांगता के क्षेत्र में काम करने वाले लोगों ने हिस्सा लिया।
पैनल चर्चा में शिक्षा और रोजगार पर हुई बात
कार्यक्रम के सुबह के सत्र में पैनल चर्चा के दौरान जमशेदपुर में सुनने में कठिनाई वाले लोगों की शिक्षा, स्किलिंग, रोजगार, अधिकार और सामाजिक भागीदारी से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा हुई।
बधिर संघों के प्रतिनिधियों और कार्मेल बाल विहार, सिद्धेश्वर स्कूल व आशाकिरण जैसे संस्थानों से जुड़े लोगों ने अपने अनुभव साझा किए। वक्ताओं ने ऐसे वातावरण की जरूरत बताई, जहां बधिर व्यक्तियों को शिक्षा, रोजगार और समाज में समान अवसर मिल सकें।
कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ विद्यार्थियों की कहानी प्रस्तुति, भारतीय सांकेतिक भाषा की बुनियादी जानकारी और ISL गीत की प्रस्तुति भी हुई।
खेल, शिक्षा, रोजगार और नृत्य में उपलब्धि हासिल करने वालों का सम्मान
दोपहर के सत्र में बधिर समुदाय के उन लोगों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाई है।
सम्मान पाने वालों में खेल क्षेत्र से सोनी और संजय, शिक्षा क्षेत्र से बिश्वजीत लाहा, स्वीटी और ईशा कुमारी गुप्ता, रोजगार क्षेत्र से अमित और जागृति तथा नृत्य के क्षेत्र से नाजिया बन्नो शामिल रहे।
‘ISL केवल संवाद का माध्यम नहीं’
इस अवसर पर सबल एवं स्पोर्ट्स के हेड स्किल डेवलपमेंट कैप्टन अमिताभ ने कहा कि भारतीय सांकेतिक भाषा सिर्फ संवाद का माध्यम नहीं है, बल्कि यह बधिर समुदाय की पहचान, संस्कृति और सामुदायिक जुड़ाव का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि परिवारों, शिक्षकों, नियोक्ताओं और सेवा प्रदाताओं के बीच ISL को लेकर जागरूकता और इसके इस्तेमाल को बढ़ाने से बधिर व्यक्तियों के लिए पहुंच और समावेशन को बेहतर बनाया जा सकता है।
शिक्षा और ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच बढ़ा रहा सबल
टाटा स्टील फाउंडेशन का सबल कार्यक्रम बधिर समुदाय के लिए ISL जागरूकता, बेसिक ISL प्रशिक्षण, शिक्षा, खेल, कौशल विकास और रोजगार से जुड़े अवसरों पर काम कर रहा है। कार्यक्रम के तहत बधिर विद्यार्थियों को आवासीय शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने के साथ झारखंड और ओडिशा के ग्रामीण इलाकों में भी ISL जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।
जमशेदपुर के कार्मेल बाल विहार में नोआमुंडी के बधिर समुदाय के 12 विद्यार्थी कक्षा VIII से XII तक आवासीय शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। वहीं जोड़ा, नोआमुंडी और दानागड़ी जैसे क्षेत्रों में भी ISL जागरूकता कार्यक्रमों का विस्तार किया गया है।
2026 की थीम ‘बधिर लोगों के मानवाधिकारों की घोषणा’
अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस हर साल 23 सितंबर को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में अंतरराष्ट्रीय बधिरजन सप्ताह 21 से 27 सितंबर तक मनाया जा रहा है और इसकी थीम “Declaring Deaf People’s Human Rights” यानी “बधिर लोगों के मानवाधिकारों की घोषणा” है। इसमें सांकेतिक भाषा के अधिकार, सुगम्यता, समावेशी शिक्षा और समाज में बधिर व्यक्तियों की पूर्ण भागीदारी पर जोर दिया जा रहा है।
2017 में शुरू हुआ था सबल
सबल टाटा स्टील फाउंडेशन का दिव्यांग समावेशन कार्यक्रम है, जिसकी शुरुआत 2017 में नोआमुंडी से हुई थी। यह झारखंड और ओडिशा में दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार आधारित समावेशन, शिक्षा, कौशल विकास, आजीविका, खेल, सुगम्यता और सामुदायिक भागीदारी के क्षेत्र में काम करता है।
कार्यक्रम का उद्देश्य दिव्यांग व्यक्तियों के लिए ऐसे अवसर तैयार करना है, जिससे संवाद और पहुंच की बाधाएं उनकी शिक्षा, रोजगार, भागीदारी और नेतृत्व के रास्ते में रुकावट न बनें।












