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पीएम मोदी का ऐतिहासिक इजराइल दौरा: कनेसैट में संबोधन, रिश्तों को नई ऊँचाइयाँ

By Riya Kumari

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पीएम मोदी का ऐतिहासिक इजराइल दौरा: कनेसैट में संबोधन, रिश्तों को नई ऊँचाइयाँ

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सोशल संवाद / डेस्क : Narendra Modi ने 25 फरवरी 2026 को Knesset (इजरायल की संसद) को संबोधित किया, यह भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा पहली बार कनेसैट में दिए गए संबोधन के रूप में इतिहास में दर्ज हुआ। इस दौरे का उद्देश्य Israel India के बीच रणनीतिक और कूटनीतिक संबंधों को और मजबूत बनाना है।

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भारत इजराइल संबंधों को मजबूती

पीएम मोदी ने अपने भाषण में दोनों देशों के गहरे साझेदारी और साझा सुरक्षा हितों को रेखांकित किया। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ “शून्य सहनशीलता” नीति का समर्थन किया और कहा कि भारत इस संघर्ष में इजरायल के साथ खड़ा है। साथ ही उन्होंने दक्षिण-पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता की आवश्यकता पर भी जोर दिया। मोदी ने बताया कि भारत ने 17 सितंबर 1950 को इजरायल को मान्यता दी थी जिस दिन उनका जन्म भी हुआ था और तब से दोनों देशों के रिश्ते निरंतर विकसित हो रहे हैं।

आतंकवाद, शांति और स्थिरता

संसद में पीएम मोदी ने 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले की निंदा करते हुए भारत की संवेदना प्रकट की और कहा कि “नागरिकों के खिलाफ हिंसा किसी भी रूप में न्यायसंगत नहीं हो सकती।” उन्होंने क्षेत्र में स्वस्थ और न्यायसंगत शांति की वकालत की।

कूटनीतिक सम्मान और अवार्ड

मोदी को कनेसैट ने “Speaker of the Knesset Medal” से सम्मानित किया—यह इजरायल की संसद का सर्वोच्च पार्लियामेंटरी सम्मान है। यह सम्मान भारत–इजराइल के बढ़ते सहयोग और राजनीतिक सम्मान का प्रतीक है।

व्यापार, रक्षा और नवाचार सहयोग

दौरे के दौरान दोनों नेताओं ने व्यापार, रक्षा, तकनीक, नवाचार और कृषि साझेदारी जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और विस्तृत करने पर जोर दिया। बातचीत में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA), तकनीकी साझेदारी और ऊँची तकनीक क्षेत्रों के लिए संयुक्त पहल शामिल हैं।

नेतृत्व का मैत्रीपूर्ण संबंध

इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया और bilateral ties को “भाई से भी अधिक” बताया। बाद में दोनों नेताओं ने प्रतीकात्मक रूप से कार सवारी साझा की, जो एकता और दोस्ती का प्रतीक बनी।

वैश्विक संदर्भ में भारत की भूमिका

मोदी ने कहा कि भारत ना केवल इजरायल के साथ मजबूती से खड़ा है, बल्कि वैश्विक मंचों पर शांति, सुरक्षा और बहुपक्षीय सहयोग के लिए भी काम करता है। उन्होंने दोनों देशों की साझेदारी को “ऐतिहासिक और रणनीतिक” बताया और कहा कि यह भविष्य की चुनौतियों का समाधान तलाशने वाला है।

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