AI इमेज टूल्स के पॉपुलर होने के बाद प्राइवेसी को लेकर चिंता

By Riya Kumari

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AI इमेज टूल्स के पॉपुलर होने के बाद प्राइवेसी को लेकर चिंता

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सोशल संवाद / डेस्क : AI इमेज टूल्स के बढ़ते इस्तेमाल से इस बात को लेकर नई चिंता पैदा हो गई है कि यूज़र्स जो फ़ोटो अपलोड करते हैं, उनका क्या होता है। बहुत से लोग पहले से ही AI से बने वीडियो बना रहे हैं या फ़ोटो को विंटेज स्टाइल या बहुत अच्छी क्वालिटी में बदल रहे हैं।

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प्राइवेसी को लेकर बढ़ती चिंता के कारण एक्सपर्ट्स यूज़र्स को सलाह दे रहे हैं कि वे AI सर्विसेज़ पर पर्सनल फ़ोटो या सेंसिटिव डेटा अपलोड करते समय सावधानी बरतें। अलग-अलग सर्विसेज़ की प्राइवेसी पॉलिसी, स्टोरेज के तरीके और अपलोड की गई इमेज के इस्तेमाल से जुड़े नियम अलग-अलग होते हैं।

सोशल मीडिया पर AI से बनी इमेज के ज़्यादा दिखने के साथ, प्राइवेसी को लेकर यह चिंता और भी अहम हो गई है।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि प्राइवेसी से जुड़ी ज़्यादातर चिंताएं थर्ड-पार्टी सर्विसेज़ को इमेज, डेटा और डॉक्यूमेंट्स का एक्सेस देने को लेकर हैं। पर्सनल इमेज अपलोड करने से पहले किसी एप्लीकेशन की प्राइवेसी पॉलिसी ज़रूर देख लेनी चाहिए। जिन डेटा, डॉक्यूमेंट्स और फ़ोटो में पर्सनल जानकारी हो, उन्हें तब तक अपलोड नहीं करना चाहिए जब तक सर्विस प्रोवाइडर यह साफ़ तौर पर न बताए कि वे ऐसे डेटा का इस्तेमाल और स्टोरेज कैसे करेंगे। एक्सपर्ट्स का कहना है कि AI इमेज जनरेशन टूल्स का ज़िम्मेदारी से इस्तेमाल करना ही आगे का सही रास्ता है।

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