सोशल संवाद / दिल्ली : ऐसा है कि राहुल गाँधी अत्यंत प्रतिभाशाली और इतने अद्भुत ज्ञानवान हैं कि देश-विदेश के इतने यूनिवर्सिटीज ने उनको बुलाया भाषण देने के लिए लेकिन भारत की किसी यूनिवर्सिटी ने उन्हें नहीं बुलाया। राहुल गाँधी के ज्ञान पर कौन टिप्पणी कर सकता है?

राहुल गाँधी केवल ‘जी राम जी’ का नाम लेने में अटक गए, ऐसा नहीं है। याद करिए विश्वेश्वरैया भी नहीं बोल पाए थे जो भारत के फर्स्ट इंजीनियर थे और अगर पूरा नाम लेना पड़ जाता तो पता नहीं क्या हो जाता!
फिर याद करिए वो 2019 के चुनाव में राजस्थान में गए थे और कांग्रेस के 1 बहुत बड़े नेता थे कुंभाराम जी उनके नाम पर अशोक गहलोत की सरकार ने योजना शुरू की थी लेकिन राहुल गाँधी एक नहीं तीन-तीन बार उसे कुंभकरण योजना बोल गए थे। अब इतना अद्भुत ज्ञान सम्पन्न जो व्यक्ति हो वो समझे कि भारत में कुंभकरण के नाम पर भी कोई योजना हो सकती है यानि अपने ही नेता का सबके सामने मजाक रहा हो तो क्या कह सकते हैं!
मुझे लगता है कि एक कहावत होती है – ‘मुंह में राम, बगल में छुरी’ पर यहाँ तो मुँह में भी राम नहीं आ पा रहा है वो भी किसके जो कहता है कि मैं परम शिव भक्त हूँ और कुर्ते के ऊपर जनेऊ दिखाने वाला, गोत्र सहित अपना विचार बताने वाला ब्राह्मण हूँ तो मुझे लगता है इस देश की प्रबुद्ध जनता ने बगुला भगत और रंगा सियार की कहानी पढ़ रखी है।
यह कांग्रेस पार्टी और उसके शीर्ष नेताओं की भगवान राम के प्रति घृणा, तिरस्कार, अवमानना और इरेडिकेशन ऑफ़ सनातन धर्म का जो संकल्प तमिलनाडु की सरकार ने लिया है, उसके प्रति उनके कमिटमेंट को दर्शाता है।










