अज्ञात शव की पहचान और अंतिम संस्कार पर सवाल, NHRC ने मांगी Updated Investigation Report

By Riya Kumari

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अज्ञात शव की पहचान और अंतिम संस्कार पर सवाल, NHRC ने मांगी Updated Investigation Report

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सोशल संवाद / चक्रधरपुर: अज्ञात शव की पहचान, मृत्यु के कारण और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को लेकर मानवाधिकार कार्यकर्ता बैरम खान ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC), नई दिल्ली के समक्ष कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं। मामला NHRC Case No. 794/34/6/2025 से संबंधित है। उन्होंने मृतक सैफ अली/शेख अली की पहचान से लेकर अंतिम संस्कार तक की पूरी प्रक्रिया को रिकॉर्ड और वैज्ञानिक जांच के आधार पर स्पष्ट करने की मांग की है।

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NHRC ने 16 सितंबर 2026 को जारी पत्र में Bagbera PS UD Case No. 06/25 की Updated Investigation Report छह सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। रिपोर्ट जमा करने की अंतिम तारीख 7 नवंबर 2026 निर्धारित की गई है।

72 घंटे बाद शव का अंतिम संस्कार क्यों किया गया?

पुलिस की ओर से NHRC को दी गई ATR के अनुसार शव को MGM Hospital, Dimna, Jamshedpur के मॉर्चरी कोल्ड स्टोरेज में 72 घंटे तक रखा गया था। इस दौरान शव की प्रारंभिक पहचान नहीं हो सकी।

इसके बाद जांच अधिकारी ने शव की तस्वीर समाचार पत्र में प्रकाशित कराई। तस्वीर देखकर परिजनों ने शव की पहचान अपने पुत्र Saif Ali के रूप में की। ATR में उल्लेख है कि 72 घंटे की अवधि समाप्त होने के बाद शव का Pawati Ghat में अंतिम संस्कार किया गया।

बैरम खान ने सवाल उठाया है कि 72 घंटे बाद अंतिम संस्कार का निर्णय किस अधिकारी ने लिया और क्या इसके लिए कोई लिखित आदेश या अनुमति जारी की गई थी।

उन्होंने अंतिम संस्कार से जुड़े रजिस्टर, अनुमति, पंचनामा, शव को घाट तक ले जाने का रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेज सार्वजनिक जांच के दायरे में लाने की मांग की है।

धार्मिक पहचान को लेकर भी सवाल

बैरम खान का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी अधिकारी या संस्था पर पहले से आरोप लगाना नहीं है। वे यह स्पष्ट कराना चाहते हैं कि अज्ञात शव के मामले में कानून, मानवाधिकार मानकों और मृतक की गरिमा से संबंधित प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं।

उनके अनुसार, NHRC की Advisory में अज्ञात शवों का अंतिम संस्कार सम्मान और गरिमा के साथ तथा मृतक के धर्म को ध्यान में रखते हुए किए जाने की बात कही गई है।

उन्होंने Maithon Power Limited v. State of Jharkhand मामले में झारखंड हाईकोर्ट की टिप्पणियों का भी हवाला दिया है। इसके अलावा झारखंड नगरपालिका अधिनियम, 2011 की धारा 372 के तहत भी शव के निस्तारण को जहां तक संभव हो, मृतक की धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप किए जाने का प्रावधान बताया गया है।

शव की पहचान की प्रक्रिया पर भी जवाब मांगा

बैरम खान ने Updated Investigation Report में यह स्पष्ट करने की मांग की है कि पहचान की प्रक्रिया के दौरान:

  • शव की तस्वीर किस तरह सुरक्षित की गई?
  • क्या फिंगरप्रिंट लिए गए थे?
  • मृतक के कपड़े और निजी सामान का रिकॉर्ड तैयार किया गया?
  • क्या आसपास के थानों में पहचान संबंधी सूचना भेजी गई?
  • क्या वैज्ञानिक माध्यमों से पहचान की पुष्टि हुई?
  • परिजनों द्वारा की गई पहचान का विधिवत रिकॉर्ड क्या है?

‘Saif Ali’ और ‘Shaikh Ali’ नाम में अंतर

मामले में दस्तावेजों के बीच नाम को लेकर भी सवाल उठाया गया है। NHRC को भेजी गई पुलिस ATR में मृतक का नाम एक जगह “Saif Ali” बताया गया है, जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के संदर्भ में “Shaikh Ali” नाम दर्ज होने की बात सामने आई है।

बैरम खान ने मांग की है कि Updated Investigation Report में स्पष्ट किया जाए कि Saif Ali और Shaikh Ali एक ही व्यक्ति हैं या नहीं और सरकारी रिकॉर्ड में मृतक का सही नाम क्या है।

UD केस और शव मिलने की तारीख पर भी स्पष्टीकरण

ATR में Bagbera PS UD Case No. 06/25 dated 24.04.2025 का उल्लेख है, जबकि NHRC रिकॉर्ड में शव मिलने की तारीख 3 मई 2025 बताई गई है।

बैरम खान ने जांच की पूरी chronology को रिकॉर्ड के आधार पर स्पष्ट करने की मांग की है, ताकि मामले में तारीखों को लेकर कोई अस्पष्टता न रहे।

Electrocution और FSL रिपोर्ट पर सवाल

पुलिस ATR के अनुसार पोस्टमार्टम में मृत्यु का कारण electric current/electrocution बताया गया है। साथ ही मृतक का viscera sample FSL Ranchi भेजे जाने और रिपोर्ट लंबित होने की जानकारी दी गई है।

Updated Investigation Report में बैरम खान ने यह स्पष्ट करने की मांग की है कि:

  • Electrocution के निष्कर्ष का वैज्ञानिक आधार क्या है?
  • घटनास्थल की विद्युत व्यवस्था की जांच हुई या नहीं?
  • शरीर पर मिले चोट या जलने के निशानों का क्या निष्कर्ष निकला?
  • FSL Ranchi भेजे गए sample की वर्तमान स्थिति क्या है?
  • FSL रिपोर्ट प्राप्त हुई या अभी लंबित है?
  • आवश्यकता होने पर DNA, fingerprint या अन्य वैज्ञानिक माध्यमों से पहचान की पुष्टि की गई या नहीं?

“जांच पूरी हो, निष्कर्ष पहले से तय न हो”

बैरम खान ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था को दोषी ठहराना नहीं है। उनके मुताबिक मृतक की पहचान, मृत्यु का वास्तविक कारण और अंतिम संस्कार की पूरी प्रक्रिया दस्तावेजों तथा वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर स्पष्ट होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुसार हुई है तो संबंधित रिकॉर्ड सामने आने से परिजनों और आम लोगों के सवालों का समाधान होगा। वहीं, यदि प्रक्रिया में कोई कमी सामने आती है तो उसकी जिम्मेदारी तय की जा सकेगी।

NHRC के निर्देश से बढ़ी जवाबदेही

NHRC ने 16 सितंबर 2026 को East Singhbhum के SSP को Bagbera PS UD Case No. 06/25 की Updated Investigation Report छह सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। रिपोर्ट की अंतिम समयसीमा 7 नवंबर 2026 है।

बैरम खान ने मांग की है कि नई रिपोर्ट में पुराने ATR को दोहराने के बजाय शव की पहचान, मृत्यु का कारण, FSL रिपोर्ट, अंतिम संस्कार, धार्मिक पहचान, संबंधित आदेश/अनुमति और परिजनों के दस्तावेजों पर बिंदुवार जवाब दिया जाए।

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