सोशल संवाद / नई दिल्ली : कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से 2018 में एससी-एसटी अधिनियम बचाने के लिए हुए आंदोलन में दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मांग की है। साथ ही देश में दलित समाज के संस्थागत उत्पीड़न और ईमानदार दलित अधिकारियों के साथ हो रहे भेदभाव के मुद्दे पर भाजपा सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए राष्ट्रपति से उत्तर प्रदेश के आईएएस रिंकू सिंह राही का इस्तीफा स्वीकार न करने की मांग उठाई है।

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नई दिल्ली स्थित कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए पार्टी के अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम ने बताया कि 02 अप्रैल 2018 को देशभर के एससी-एसटी युवाओं ने एससी-एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम को बचाने के लिए संवैधानिक आंदोलन किया था। उन्होंने कहा कि इस दौरान पुलिस और जातिवादी तत्वों की गोलीबारी में 14 युवाओं की मौत हो गई थी।
उन्होंने मृतकों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि युवाओं ने संवैधानिक तरीके से आंदोलन किया था, लेकिन उनके खिलाफ पूरे देश में मुकदमे दर्ज किए गए और वे आज भी अदालतों के चक्कर काट रहे हैं। उन्होंने बताया कि राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मांग की है कि आंदोलन के दौरान युवाओं पर दर्ज मुकदमे तुरंत वापस लिए जाएं। इसके साथ ही राहुल गांधी ने कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भी इन युवाओं के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करने को कहा है।
राजेंद्र पाल गौतम ने उत्तर प्रदेश कैडर के 2021 बैच के आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही द्वारा इस्तीफा दिए जाने का का मामला प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि कड़ी मेहनत कर आईएएस-पीसीएस अधिकारी बनने पर भी दलितों के साथ प्रताड़ना जारी रहती है और कई बार हालात ऐसे बनते हैं कि वो अधिकारी अपनी नौकरी से ही इस्तीफा देने को मजबूर हो जाता है। उन्होंने बताया कि पीसीएस अधिकारी रहते हुए राही ने एससी फंड से जुड़े करोड़ों रुपये के घोटाले का पर्दाफाश किया था, जिसके बाद उन पर जानलेवा हमला हुआ और उन्हें सात गोलियां लगीं।
इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और 2021 में परीक्षा पास कर आईएएस अधिकारी बन गए, लेकिन पिछले आठ महीनों से उन्हें कोई काम नहीं दिया गया, जिससे आहत होकर उन्होंने वेतन लेने से मना कर दिया और अंततः इस्तीफा भेज दिया। गौतम ने बताया कि राही ने एक इंटरव्यू में कहा है कि नौकरशाही में भ्रष्टाचार का एक समानांतर तंत्र चल रहा है, जहां बिना काम के भी भुगतान हो जाता है।
उन्होंने सवाल उठाया कि अगर कोई अधिकारी भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाता है, तो क्या उसे दलित होने की सजा दी जाएगी? क्या देश में ऐसे ईमानदार अधिकारियों की जरूरत नहीं है? उन्होंने राष्ट्रपति से मांग की कि रिंकू सिंह राही का इस्तीफा स्वीकार न किया जाए और उत्तर प्रदेश सरकार को उन्हें सम्मानजनक जिम्मेदारी देने के निर्देश दिए जाएं।
गौतम ने शैक्षणिक संस्थानों में हो रहे भेदभाव पर भी प्रहार किया। उन्होंने हरियाणा में असिस्टेंट प्रोफेसर (अंग्रेजी) की भर्ती का उदाहरण देते हुए कहा कि 120 पदों के विरुद्ध मुकाबले केवल तीन दलित युवाओं का चयन किया गया, जबकि 117 योग्य उम्मीदवारों को ‘नॉट फ़ाउंड सूटेबल’ बताकर बाहर कर दिया गया।
उन्होंने रोहित वेमुला और पायल तड़वी जैसे मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों में दलित छात्रों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है। उनके साथ अन्याय और भेदभाव होता है और संघर्ष कर आगे बढ़ने के बाद भी योग्य होने के बावजूद उन्हें नौकरी के अवसरों से वंचित किया जाता है।
राहुल गांधी ने लिखा प्रधानमंत्री को पत्र, कहा- निर्दोष युवा मुकदमों का बोझ उठा रहे
वहीं लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने एससी-एसटी एक्ट बचाओ आंदोलन में दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मांग करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। उन्होंने इसकी जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर देते हुए कहा कि आठ साल पहले, एससी-एसटी एक्ट को कमजोर करने के खिलाफ लाखों दलित-आदिवासी युवाओं ने आंदोलन किया, जिसमें कई गिरफ्तार हुए। उन्होंने कहा कि संसद ने कानून तो मजबूत किया, लेकिन आज भी निर्दोष युवा मुकदमों का बोझ उठा रहे हैं। इनमें से कई युवा पहली पीढ़ी के शिक्षार्थी हैं, जिनकी शिक्षा, रोजगार और भविष्य इन मामलों से प्रभावित हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मजबूत एससी-एसटी एक्ट युवाओं का हक है और शांतिपूर्ण आंदोलन उनका अधिकार। उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील की कि इस मामले में संवेदनशील व न्यायपूर्ण दृष्टिकोण अपनाते हुए व्यक्तिगत हस्तक्षेप करें और लंबित मामलों को जल्द समाप्त करने की दिशा में कदम उठाएं, ताकि निर्दोष युवाओं को राहत मिल सके।









