सोशल संवाद / चक्रधरपुर: दक्षिण पूर्व रेलवे के Chakradharpur रेल मंडल में मंगलवार को आयोजित सेवानिवृत्ति सम्मान समारोह भावनात्मक माहौल में संपन्न हुआ। समारोह में कुल 69 रेलकर्मियों को उनकी लंबी और समर्पित सेवाओं के लिए सम्मानित करते हुए विदाई दी गई। इनमें सबसे अधिक 41 वर्ष 7 माह 21 दिन तक रेलवे की सेवा देने वाले खुर्शीद अनवर विशेष आकर्षण का केंद्र रहे।
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संघर्ष से शुरू हुआ सफर, मेहनत से बनाई अलग पहचान
खुर्शीद अनवर की सेवा यात्रा संघर्ष और मेहनत की प्रेरणादायक कहानी है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1984 में सड़क दुर्घटना में उनके पिता मोहम्मद कैस का असामयिक निधन हो गया था। उस समय परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। 18 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद उन्हें 13 नवंबर 1984 को अनुकंपा के आधार पर भारतीय रेलवे में नियुक्ति मिली।
वेल्डर से सीनियर टेक्नीशियन तक का सफर
रेलवे में उन्होंने अपने करियर की शुरुआत आदित्यपुर में एक सामान्य वेल्डर के रूप में की। कड़ी मेहनत, तकनीकी दक्षता और अनुशासित कार्यशैली के बल पर उन्होंने लगातार प्रगति की। बाद में उनका तबादला चक्रधरपुर कैरेज एंड वैगन विभाग में हुआ, जहां उन्होंने सीनियर टेक्नीशियन के पद पर कार्य करते हुए 30 जून 2026 को सम्मानपूर्वक सेवानिवृत्ति प्राप्त की।
उत्कृष्ट सेवा के लिए कई प्रतिष्ठित सम्मान
अपने चार दशक से अधिक लंबे कार्यकाल में खुर्शीद अनवर ने हमेशा जिम्मेदारी और ईमानदारी के साथ अपनी सेवाएं दीं। उनकी उत्कृष्ट कार्यशैली और समयपालन को देखते हुए उन्हें तीन बार डीआरएम अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। इसके अलावा रेलवे मुख्यालय गार्डनरीच में उन्हें प्रतिष्ठित सीएमई अवॉर्ड भी प्रदान किया गया, जो उनकी तकनीकी दक्षता और समर्पण का प्रमाण है।
सेवानिवृत्ति के बाद भी रेलवे सेवा का जज्बा कायम
सेवानिवृत्ति के बाद भी खुर्शीद अनवर रेलवे से जुड़े रहना चाहते हैं। उन्होंने रेलवे की री-इंगेजमेंट योजना के तहत आवेदन किया है, ताकि अपने अनुभव और विशेषज्ञता का लाभ आगे भी रेलवे को दे सकें।
अधिकारियों और सहकर्मियों ने दी भावभीनी विदाई
सेवानिवृत्ति समारोह में मौजूद अधिकारियों और सहकर्मियों ने खुर्शीद अनवर की ईमानदारी, कार्यनिष्ठा और अनुकरणीय सेवा की सराहना करते हुए उनके स्वस्थ एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना की। सभी ने उनके योगदान को रेलवे परिवार के लिए प्रेरणादायक बताया।
निष्कर्ष
खुर्शीद अनवर की 41 वर्ष से अधिक लंबी सेवा यह साबित करती है कि कठिन परिस्थितियों में भी मेहनत, ईमानदारी और समर्पण के बल पर सफलता और सम्मान दोनों हासिल किए जा सकते हैं। उनका सेवा जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा।










