सोशल संवाद / डेस्क : आदिवासी भूमिज मुंडा चुआड़ सेना द्वारा दायर सिविल मुकदमे में Ranchi सिविल कोर्ट में 20 अप्रैल 2026 को अहम सुनवाई हुई। यह मामला ‘झारखंड की समर गाथा’ पुस्तक में चुआड़ विद्रोह के तथ्यों को गलत तरीके से पेश किए जाने को लेकर दर्ज किया गया है।
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प्रतिवादी लगातार रहे अनुपस्थित
मामले में प्रतिवादी पक्ष निधि बुक्स (प्रकाशन), इसके मैनेजिंग डायरेक्टर और दानिश डिस्ट्रीब्यूटर्स लगातार सुनवाई से अनुपस्थित रहे। अदालत द्वारा पहले ही सम्मन और नोटिस जारी किए जा चुके थे, लेकिन इसके बावजूद कोई पेशी नहीं हुई।
कोर्ट ने दिया बड़ा आदेश
प्रतिवादियों की बार-बार गैरहाजिरी को गंभीर मानते हुए अदालत ने उनका जवाब दाखिल करने का अंतिम मौका खत्म कर दिया है। साथ ही अब मामले में एकतरफा कार्रवाई (ex-parte proceeding) का आदेश दिया गया है।
आदिवासी समाज की प्रतिक्रिया
आदिवासी नेता लक्ष्मीनारायण मुंडा ने कहा कि यह मामला समुदाय की भावनाओं से जुड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुस्तक में चुआड़ विद्रोह और रघुनाथ महतो के इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है, जिसे लेकर समाज ने कानूनी रास्ता अपनाया।
क्या है चुआड़ विद्रोह?
चुआड़ विद्रोह भूमिज आदिवासी समुदाय के गौरवशाली इतिहास का हिस्सा है, जिसने अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष का एक महत्वपूर्ण अध्याय लिखा था।
रांची कोर्ट का यह फैसला इस मामले में अहम मोड़ साबित हो सकता है। अब एकतरफा कार्रवाई के तहत आगे की सुनवाई होगी, जिस पर सभी की नजरें टिकी हैं।









