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रांची नगर निगम चुनाव 2026: प्रचार थमा, आखिरी दिन करोड़ों खर्च, अब डोर-टू-डोर संपर्क तेज

By Muskan Thakur

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सोशल संवाद/डेस्क : रांची नगर निगम चुनाव 2026 को लेकर शहर में कई दिनों से चल रहा चुनावी शोर अब थम चुका है। शनिवार शाम पांच बजे के बाद सार्वजनिक प्रचार पर रोक लग गई, लेकिन मतदान से ठीक पहले प्रत्याशियों ने जनसमर्थन जुटाने में पूरी ताकत झोंक दी। अनुमान है कि प्रचार के अंतिम दिन मेयर और पार्षद उम्मीदवारों ने मिलकर करीब साढ़े पांच करोड़ रुपये खर्च किए।

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23 फरवरी को होने वाले मतदान से पहले यह आखिरी मौका था, जब उम्मीदवार खुलकर रैलियां, पदयात्राएं और बाइक जुलूस निकाल सकते थे। शहर के अलग-अलग वार्डों में सुबह से ही चुनावी हलचल तेज रही। सैकड़ों बाइक के साथ शक्ति प्रदर्शन, बैनर-पोस्टर और समर्थकों की भीड़ ने माहौल को पूरी तरह चुनावी रंग में रंग दिया।

इस बार रांची नगर निगम चुनाव में मेयर पद के लिए 11 प्रत्याशी मैदान में हैं, जबकि 364 पार्षद उम्मीदवार अपने-अपने वार्ड में किस्मत आजमा रहे हैं। प्रचार के अंतिम दिन कई प्रत्याशियों ने समर्थकों को एकजुट करने के लिए विशेष रणनीति अपनाई। जानकारी के अनुसार, बाइक रैली में शामिल होने वाले समर्थकों को पेट्रोल खर्च के लिए प्रति बाइक लगभग 200 रुपये और कुछ जगहों पर प्रति व्यक्ति 500 रुपये तक नकद राशि दी गई। इसके अलावा भोजन और अन्य व्यवस्थाओं पर भी खर्च किया गया।

यदि औसतन प्रत्येक पार्षद प्रत्याशी द्वारा अंतिम दिन करीब डेढ़ लाख रुपये खर्च मानें, तो कुल खर्च का आंकड़ा करोड़ों में पहुंच जाता है। मेयर प्रत्याशियों के बड़े स्तर के प्रचार कार्यक्रमों को जोड़ दिया जाए तो यह राशि और भी अधिक हो सकती है। हालांकि, वास्तविक खर्च का आकलन चुनाव आयोग की रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।

प्रचार अवधि समाप्त होने के बाद अब प्रत्याशी ‘डोर-टू-डोर’ अभियान पर फोकस कर रहे हैं। रविवार देर रात तक उम्मीदवार अपने समर्थकों के साथ घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क करेंगे। चुनावी भाषा में इसे निर्णायक समय माना जाता है, क्योंकि व्यक्तिगत मुलाकात का असर मतदाताओं के फैसले पर महत्वपूर्ण माना जाता है।

शहर के विभिन्न इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है। प्रशासन ने मतदान को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष कराने के लिए विशेष तैयारी की है। मतदान केंद्रों पर सुरक्षा बलों की तैनाती और संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी की जा रही है।

अब सबकी नजरें 23 फरवरी को होने वाले मतदान और उसके बाद आने वाले नतीजों पर टिकी हैं। यह चुनाव न सिर्फ नगर निगम की सत्ता तय करेगा, बल्कि आने वाले वर्षों में रांची के विकास की दिशा भी निर्धारित करेगा। मतदाता किसे अपना प्रतिनिधि चुनते हैं, इसका फैसला जल्द ही सामने होगा।

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