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836 लिपिक पदों की भर्ती रद्द, नई नियमावली के तहत होगी नियुक्ति

By Sharia Nasrah

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836 लिपिक पदों की भर्ती रद्द, नई नियमावली के तहत होगी नियुक्ति
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सोशल संवाद /रांची : झारखंड सरकार ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) के माध्यम से प्रस्तावित 836 लिपिक (क्लर्क) पदों की भर्ती प्रक्रिया रद्द कर दी है। यह भर्ती वर्ष 2022 की इंटरमीडिएट स्तरीय संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के तहत होनी थी।

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ये पद नगर विकास एवं आवास, खान एवं भूतत्व, श्रम नियोजन एवं प्रशिक्षण तथा उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के क्षेत्रीय कार्यालयों के लिए प्रस्तावित थे। कार्मिक विभाग ने 15 जुलाई को इन पदों की अधियाचना वापस लेने का निर्णय लिया था। चारों विभागों से सहमति मिलने के बाद भर्ती प्रक्रिया निरस्त करने का आदेश जारी कर दिया गया।

सरकार के अनुसार, राज्य मंत्रिपरिषद द्वारा लिपिक पदों की नियुक्ति के लिए नई नियमावली को मंजूरी दी गई है। अब आगे की भर्ती इसी नियमावली के तहत की जाएगी। नए विज्ञापन में अन्य विभागों के क्षेत्रीय कार्यालयों के पद भी शामिल किए जा सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, नई अधियाचना में पदों की संख्या मौजूदा 836 से अधिक होने की संभावना है, हालांकि नई भर्ती की तिथि अभी घोषित नहीं की गई है।

पारा शिक्षकों की आवेदन प्रक्रिया स्थगित

जेएसएससी ने झारखंड प्रशिक्षित सहायक आचार्य संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा-2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया फिलहाल स्थगित कर दी है। आवेदन 31 जुलाई से शुरू होकर 30 अगस्त तक चलने थे, लेकिन आवेदन सॉफ्टवेयर में तकनीकी सुधार लंबित होने के कारण आयोग ने प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से रोक दी है।

JPSC परीक्षा अनियमितता मामले में एल. ख्यांग्ते से फिर पूछताछ

रांची: जेपीएससी परीक्षा में कथित अनियमितता मामले की जांच के तहत सीआईडी ने पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते से शुक्रवार को करीब नौ घंटे तक पूछताछ की। इस दौरान तत्कालीन परीक्षा उप नियंत्रक श्वेता गुप्ता को आमने-सामने बैठाकर क्रॉस-इंटरोगेशन किया गया।

सीआईडी ने जेपीएससी और टीडीपीएल कार्यालय से जब्त डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर दोनों से बिंदुवार पूछताछ की और उनकी भूमिका की जांच की। टीडीपीएल के अन्य कर्मचारियों से भी आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की गई। एल. ख्यांग्ते सुबह 11 बजे सीआईडी कार्यालय पहुंचे और रात करीब 8 बजे पूछताछ के बाद लौटे।

सीआईडी ने उन्हें सोमवार को दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया है। जांच एजेंसी का कहना है कि अब तक की जांच में परीक्षा में अनियमितता के कई अहम साक्ष्य मिले हैं, जिनका सत्यापन किया जा रहा है।

वहीं, सात दिनों की रिमांड पूरी होने के बाद परीक्षा उप नियंत्रक श्वेता गुप्ता, टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह, मार्केटिंग मैनेजर एवं पोडैयाहाट के तत्कालीन बीएसओ अभय तिवारी तथा टीडीपीएल कर्मी मोहम्मद उस्मान और मोहम्मद एबाद को कोर्ट में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

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