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सोना देवी विश्वविद्यालय में रिसर्च वर्कशॉप, शोधार्थियों को आधुनिक शोध पद्धतियों की दी जानकारी

By Riya Kumari

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सोना देवी विश्वविद्यालय में रिसर्च वर्कशॉप, शोधार्थियों को आधुनिक शोध पद्धतियों की दी जानकारी
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सोशल संवाद / घाटशिला : सोना देवी विश्वविद्यालय, घाटशिला में विद्यार्थियों और शोधार्थियों के शोध कौशल, नवाचार एवं अकादमिक दक्षता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विशेष Research Workshop का आयोजन किया गया। कार्यशाला में शोधार्थियों को आधुनिक शोध-पद्धतियों, अकादमिक लेखन और डिजिटल संसाधनों के प्रभावी उपयोग की जानकारी दी गई।

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कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य शोध की गुणवत्ता और मौलिकता को बढ़ाने के साथ शोध को सामाजिक उपयोगिता से जोड़ना रहा। इस दौरान शोध विषय के चयन, शोध समस्या की पहचान, साहित्य समीक्षा, डेटा विश्लेषण, शोध लेखन और शोध निष्कर्ष जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञ ने मार्गदर्शन दिया।

शोध केवल डिग्री हासिल करने का माध्यम नहीं : डॉ. शिवचन्द्र झा

कार्यक्रम का शुभारंभ सोना देवी विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. शिवचन्द्र झा ने किया। उन्होंने कहा कि किसी विश्वविद्यालय की अकादमिक पहचान केवल शिक्षण कार्य से नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शोध, नवाचार और ज्ञान-सृजन से भी निर्धारित होती है।

उन्होंने कहा कि शोध केवल उपाधि प्राप्त करने की औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि नए ज्ञान की खोज, स्थापित धारणाओं के विश्लेषण और सामाजिक समस्याओं के समाधान का माध्यम है। उन्होंने शोधार्थियों से मौलिकता, तार्किकता, प्रमाणिकता और सामाजिक प्रासंगिकता को अपने शोध का हिस्सा बनाने की अपील की।

डॉ. झा ने डिजिटल युग में शोध के बदलते स्वरूप का उल्लेख करते हुए कहा कि ऑनलाइन जर्नल, डिजिटल डेटाबेस और आधुनिक तकनीकी टूल्स ने शोध के अवसरों को व्यापक बनाया है। ऐसे में शोधार्थियों के लिए तकनीकी और डिजिटल दक्षता हासिल करना भी जरूरी है।

Research Skills और Innovation पर विशेषज्ञ ने दिया मार्गदर्शन

कार्यशाला के विशेषज्ञ प्रवीण कुमार महतो, Faculty Member, Research and HPC Division, JCERT ने शोधार्थियों को Research Skills, Research Competency और Innovation के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

उन्होंने शोध विषय के चयन, शोध समस्या की पहचान, उद्देश्य निर्धारण, साहित्य समीक्षा, आंकड़ों के विश्लेषण और शोध लेखन की प्रक्रिया समझाई। उन्होंने कहा कि शोध में केवल उपलब्ध सूचनाओं को एकत्र करना पर्याप्त नहीं है। शोधार्थियों को उपलब्ध ज्ञान का आलोचनात्मक और तार्किक विश्लेषण करते हुए नए दृष्टिकोण और निष्कर्ष विकसित करने चाहिए।

प्रवीण कुमार महतो ने शोधार्थियों को नवीनतम अकादमिक साहित्य से जुड़े रहने और डिजिटल एवं तकनीकी संसाधनों का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया। कार्यशाला में शोधार्थियों ने विभिन्न सवाल पूछे, जिनका विशेषज्ञ ने विस्तार से जवाब दिया।

शोध और नवाचार विश्वविद्यालय की प्राथमिकता : कुलसचिव डॉ. नीत नयना

कुलसचिव डॉ. नीत नयना ने कहा कि किसी भी उच्च शिक्षण संस्थान की प्रगति का आकलन उसके शोध और नवाचार की गुणवत्ता से भी किया जाता है। उन्होंने कहा कि सोना देवी विश्वविद्यालय शोधार्थियों को ऐसा अकादमिक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है, जहां वे स्वतंत्र रूप से सोच सकें और नए विचार विकसित कर सकें।

उन्होंने शोधार्थियों से कार्यशाला में मिली जानकारी को अपने शोध कार्य में लागू करने और अपने शोध को अधिक गुणवत्तापूर्ण एवं प्रभावी बनाने का आह्वान किया।

गुणवत्तापूर्ण शोध से मजबूत होती है विश्वविद्यालय की पहचान : कुलपति

कुलपति प्रोफेसर डॉ. ब्रज मोहन पाट पिंगुवा ने कहा कि उच्च शिक्षा में शोध और नवाचार की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण हो रही है। विश्वविद्यालय का दायित्व केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में स्वतंत्र चिंतन, विश्लेषणात्मक क्षमता और नवाचार की भावना विकसित करना भी है।

उन्होंने शोधार्थियों से अपने शोध को समाज और राष्ट्र की आवश्यकताओं से जोड़ने का प्रयास करने की अपील की। साथ ही नियमित अध्ययन और नवीनतम शोध साहित्य से अपडेट रहने पर जोर दिया।

शोध समाज और राष्ट्र के विकास का माध्यम बने : कुलाधिपति

कुलाधिपति प्रभाकर सिंह ने कहा कि शोध किसी भी राष्ट्र की बौद्धिक और ज्ञान-संपदा को समृद्ध करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने शोधार्थियों से शोध में मौलिकता, गुणवत्ता, अनुशासन, नवाचार और सामाजिक सरोकार को प्राथमिकता देने की अपील की।

उन्होंने कहा कि सामाजिक समस्याओं को समझने और उनके समाधान की दिशा में योगदान देने वाला शोध व्यापक प्रभाव पैदा कर सकता है। उन्होंने शोधार्थियों को “सीखें, प्रश्न करें, विश्लेषण करें और नए ज्ञान का सृजन करें” की भावना के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

शोधार्थियों में दिखा उत्साह

कार्यशाला के दौरान शोधार्थियों में खासा उत्साह देखने को मिला। उन्होंने शोध प्रक्रिया, अकादमिक लेखन, नवाचार और आधुनिक तकनीकी संसाधनों से जुड़े सवाल विशेषज्ञ के सामने रखे।

विशेषज्ञ ने शोधार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए शोध को व्यवस्थित, प्रमाणिक, मौलिक और प्रभावी बनाने के सुझाव दिए। कार्यशाला के माध्यम से शोधार्थियों को यह समझने का अवसर मिला कि गुणवत्तापूर्ण शोध के लिए विषय ज्ञान के साथ शोध कौशल, तकनीकी दक्षता, आलोचनात्मक चिंतन और निरंतर सीखना भी जरूरी है।

आभार ज्ञापन के साथ हुआ समापन

कार्यक्रम के अंत में डॉ. कंचन सिन्हा ने विशेषज्ञ प्रवीण कुमार महतो, कुलाधिपति प्रभाकर सिंह, कुलपति प्रोफेसर डॉ. ब्रज मोहन पाट पिंगुवा, कुलसचिव डॉ. नीत नयना, विश्वविद्यालय के शिक्षकों और शोधार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्यशालाएं शोधार्थियों को अकादमिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक शोध कौशल विकसित करने में मदद करती हैं। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी मौजूद रहे।

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