सोशल संवाद / डेस्क : राजधानी दिल्ली में मौसमी इन्फ्लूएंजा के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। इस साल अब तक दिल्ली में H1N1 के 1,777 मामले सामने आ चुके हैं। H1N1 इस समय राजधानी में इन्फ्लूएंजा का प्रमुख स्ट्रेन बना हुआ है। बढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने दिल्ली की स्वास्थ्य व्यवस्था और तैयारियों की समीक्षा की।

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समीक्षा बैठक में दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह और केंद्र व दिल्ली सरकार के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में मौसमी इन्फ्लूएंजा के साथ-साथ अस्पतालों की क्षमता, जांच व्यवस्था, निगरानी और इलाज की तैयारियों पर चर्चा हुई।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने कहा कि दिल्ली मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अस्पतालों में बेड, डॉक्टर, दवाइयों और जरूरी मेडिकल उपकरणों की कोई कमी नहीं है। मरीजों को समय पर उचित इलाज उपलब्ध कराने के लिए अस्पतालों की व्यवस्थाओं को लगातार मजबूत किया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में इस साल अब तक इन्फ्लूएंजा-A के 2,392 मामले सामने आए हैं। इनमें 1,777 मामले H1N1 के हैं। इसके अलावा H1 के 37, H3 के 138 और अन्य श्रेणियों के 440 मामले दर्ज किए गए हैं।
सरकार की ओर से बीमारी की निगरानी भी तेज कर दी गई है। इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारी (ILI), गंभीर तीव्र श्वसन संक्रमण (SARI) और इन्फ्लूएंजा के मामलों की रोजाना निगरानी की जा रही है। अस्पतालों और जिला स्वास्थ्य अधिकारियों को मरीजों की स्क्रीनिंग, रिपोर्टिंग और निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने मरीजों की स्थिति के अनुसार इलाज, वेंटिलेटरी मैनेजमेंट, मास्क के इस्तेमाल और होम केयर को लेकर भी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। स्वास्थ्यकर्मियों को बीमारी के लक्षणों और मरीजों की निगरानी के संबंध में प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
डॉ. पंकज कुमार सिंह ने लोगों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं, लेकिन सावधानी जरूर बरतें। भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क का इस्तेमाल, हाथों की साफ-सफाई और संक्रमित व्यक्ति के बेहद करीब जाने से बचना संक्रमण के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है। फ्लू जैसे लक्षण होने पर खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेने की सलाह दी गई है।
सरकार का कहना है कि फिलहाल प्राथमिकता बीमारी की जल्द पहचान, समय पर इलाज और लगातार निगरानी है। केंद्र ने भी दिल्ली को जरूरत पड़ने पर हर संभव सहयोग देने का भरोसा दिया है।









