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झारखंड में सड़क दुर्घटना मुआवजा: 14.59 करोड़ रुपये अब भी बिना दावा, जागरूकता की कमी उजागर

February 24, 2026 12:44 PM
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सोशल संवाद/रांची: झारखंड में सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ित परिवारों को राहत देने के लिए अदालतें लगातार मुआवजा राशि का आदेश दे रही हैं, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि करोड़ों रुपये की यह राशि वर्षों से बिना दावा के पड़ी हुई है। राज्य में वाहन दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) के आदेशों के बावजूद 14.59 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा अब तक लाभार्थियों द्वारा नहीं लिया गया है। यह स्थिति न केवल जागरूकता की कमी, बल्कि प्रशासनिक और प्रक्रिया संबंधी खामियों की ओर भी संकेत करती है।

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आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, लेबर कोर्ट के मामलों में भी 2.68 करोड़ रुपये की राशि बिना दावा के लंबित है। इन मामलों की विस्तृत जानकारी हाई कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है, जहां केस नंबर और संबंधित मुआवजा राशि का विवरण दर्ज है। बावजूद इसके, बड़ी संख्या में पात्र परिवार राशि लेने आगे नहीं आ रहे हैं।

धनबाद और हजारीबाग में सबसे अधिक लंबित राशि

जिलावार आंकड़ों पर नजर डालें तो धनबाद और हजारीबाग की स्थिति सबसे चिंताजनक है। धनबाद में 77 सड़क दुर्घटना मामलों में करीब 7.83 करोड़ रुपये का भुगतान आदेशित हुआ था, जिसमें से 7.42 करोड़ रुपये सड़क हादसों से जुड़े मामलों के हैं, जबकि 41.34 लाख रुपये अन्य मद के हैं। यह पूरी राशि अब भी बिना दावा के पड़ी है।

हजारीबाग में 79 मामलों में 3.43 करोड़ रुपये के भुगतान का आदेश हुआ, जो अब तक लंबित है। रांची में 1.39 करोड़ रुपये सड़क दुर्घटना मामलों में और 12.05 लाख रुपये लेबर कोर्ट के मामलों में बिना दावा के जमा हैं।

कुछ जिलों में बेहतर स्थिति

हालांकि गुमला, जामताड़ा, कोडरमा और लातेहार जैसे जिलों में अदालत के आदेश के बाद मुआवजा राशि का शत-प्रतिशत भुगतान हो चुका है। गुमला में 2.30 करोड़, जामताड़ा में 22.06 लाख, कोडरमा में 48.52 लाख और लातेहार में 56.38 लाख रुपये का वितरण किया गया है। यह दर्शाता है कि सही प्रयास और जागरूकता से लंबित मामलों को सुलझाया जा सकता है।

प्रक्रिया तेज करने के निर्देश

मोटर दुर्घटना मामलों में देरी कम करने के लिए झारखंड पुलिस को निर्देश दिया गया है कि मौत से जुड़े मामलों की जांच रिपोर्ट एक महीने के भीतर ट्रिब्यूनल को भेजी जाए। 14 बिंदुओं पर विस्तृत रिपोर्ट देना अनिवार्य किया गया है ताकि मुआवजा प्रक्रिया में पारदर्शिता और गति बनी रहे।

सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, केवल समय सीमा के आधार पर मोटर दुर्घटना क्लेम याचिका खारिज नहीं की जा सकती। साथ ही मई 2025 से आधार और पैन कार्ड का विवरण अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे सही लाभार्थी तक राशि पहुंच सके।

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