बदल जायेंगे एलपीजी, एफडी बैंकिंग व जन्म-मृत्यु पंजीकरण के नियम

By Riya Kumari

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बदल जायेंगे एलपीजी, एफडी बैंकिंग व जन्म-मृत्यु पंजीकरण के नियम

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सोशल संवाद/डेस्क : अक्तूबर की शुरुआत के साथ कई ऐसे नियम लागू हो रहे हैं, जिनका असर घर के बजट से लेकर बैंकिंग और जरूरी दस्तावेजों की प्रक्रिया तक पड़ सकता है. कुछ बदलाव उपभोक्ताओं के लिए नयी सत्यापन प्रक्रिया से जुड़े हैं, तो कुछ में बैंक और कर संबंधी अनुपालन का तरीका बदलेगा. खास तौर पर एलपीजी उपभोक्ताओं, बड़ी रकम की एफडीरखने वालों को नये प्रावधानों पर ध्यान देना होगा. जन्म-मृत्यु के पंजीकरण में देरी करने वालों के लिए भी प्रक्रिया पहले से अधिक औपचारिक होगी.

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एनपीएस : शुल्क ढांचे में बदलाव एनपीएस और एनपीएस लाइट में प्वाइंट ऑफ प्रेजेंस (पीओपी) के शुल्क ढांचे में भी बदलाव लागू होगा. इसका असर संबंधित ग्राहकों से लिए -जाने वाले सेवा शुल्क पर पड़ेगा.

एलपीजी : आधार बायोमेट्रिक जरूरी सब्सिडी वाले घरेलू एलपीजी रिफिल के लिए उन उपभोक्ताओं को बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण कराना होगा, जिन्होंने अभी तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं की है. पहले से प्रमाणीकरण करा चुके ग्राहकों को दोबारा इसकी जरूरत नहीं होगी.

एफडी : बड़ी जमा पर पारदर्शिता तीन करोड़ रुपये से अधिक की बल्क डिपॉजिट पर बैंक ब्याज दरों की जानकारी अपनी वेबसाइट पर उपलब्ध करायेंगे. समान तारीख और समान राशि की जमा के लिए शाखाओं के स्तर पर दरों में एकरूपता का प्रावधान है.

जन्म-मृत्यु पंजीकरण : देरी पर अलग प्रक्रिया 21 दिन की सामान्य अवधि के बाद जन्म या मृत्यु का पंजीकरण कराने पर देरी के अनुसार अतिरिक्त दस्तावेज और सक्षम अधिकारी की मंजूरी की जरूरत होगी. ज्यादा देरी वाले मामलों में उच्च स्तर की प्रशासनिक या न्यायिक मंजूरी का प्रावधान है.

यूपीआइ : 15 से बड़े मर्चेंट भुगतान पर एमडीआर 2,000 से अधिक के कुछ यूपीआइ मर्चेंट लेनदेन पर 0.4% एमडीआर 15 अक्तूबर से लागू होगा. यह शुल्क ग्राहक से नहीं, संबंधित मर्चेंट से लिया जायेगा. सामान्य व्यक्ति-से-व्यक्ति यूपीआइ भुगतान पर यह शुल्क लागू नहीं होगा.

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