सोशल संवाद / डेस्क : रूस और यूक्रेन के बीच करीब साढ़े चार साल से जारी युद्ध का असर अब दोनों देशों की ऊर्जा व्यवस्था पर भी दिखाई दे रहा है। यूक्रेन की ओर से रूस की तेल रिफाइनरियों और ऊर्जा ठिकानों पर किए जा रहे ड्रोन हमलों के कारण वहां घरेलू ईंधन उत्पादन प्रभावित हुआ है। इसका सीधा असर रूस में पेट्रोल की उपलब्धता पर पड़ा है और अब उसे विदेशों से पेट्रोल आयात करना पड़ रहा है।
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इस स्थिति में भारत रूस को पेट्रोल की आपूर्ति करने वाले प्रमुख देशों में शामिल हो गया है। जहाजों की निगरानी और ऊर्जा कारोबार से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में रूस के पेट्रोल आयात में भारत की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रही।
गुजरात की वाडिनार रिफाइनरी से रूस पहुंचा पेट्रोल
रूस की बढ़ती ईंधन जरूरत का सबसे ज्यादा फायदा गुजरात की वाडिनार रिफाइनरी को मिलता दिखाई दे रहा है। इस रिफाइनरी का संचालन नयारा एनर्जी करती है। रिपोर्ट के मुताबिक, दो महीने के दौरान भारत से रूस को भेजे गए करीब 10 लाख बैरल गैसोलीन में बड़ी हिस्सेदारी वाडिनार रिफाइनरी की रही।
नयारा एनर्जी में रूस की सरकारी तेल कंपनी रोसनेफ्ट (Rosneft) की 50 प्रतिशत हिस्सेदारी है। ऐसे में भारत में रूसी कच्चे तेल के रिफाइन होने और फिर पेट्रोल के रूप में रूस पहुंचने की स्थिति को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।
जून-जुलाई में भारत ने बढ़ाई रूसी कच्चे तेल की खरीद
ऊर्जा विश्लेषक कंपनी वॉर्टेक्सा के आंकड़ों के मुताबिक, जून और जुलाई के दौरान भारत ने प्रतिदिन 26 लाख बैरल से ज्यादा रूसी कच्चा तेल आयात किया। फरवरी में यह आंकड़ा करीब 10 लाख बैरल प्रतिदिन था। इसका मतलब है कि कुछ महीनों के भीतर भारत द्वारा रूसी कच्चे तेल की खरीद में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई। यह भारत के कुल कच्चे तेल आयात का आधे से अधिक हिस्सा रहा।
संभावना जताई जा रही है कि रूस को भेजे गए पेट्रोल का कुछ हिस्सा उसी रूसी कच्चे तेल से भारत में तैयार किया गया हो। यानी रूस से भारत आया कच्चा तेल रिफाइन होकर पेट्रोल बना और फिर पेट्रोल के रूप में वापस रूस पहुंच गया।
रूस में घरेलू पेट्रोल उत्पादन में भारी गिरावट
यूक्रेन के लगातार ड्रोन हमलों ने रूस की रिफाइनिंग क्षमता को प्रभावित किया है। रिपोर्ट के अनुसार, रूसी रिफाइनरियों पर हमलों के कारण घरेलू पेट्रोल उत्पादन में करीब 70 प्रतिशत तक की गिरावट आई है।
ईंधन की कमी को देखते हुए रूस को पेट्रोल आयात का सहारा लेना पड़ रहा है। इसके अलावा घरेलू बाजार में ईंधन की बिक्री और निर्यात को लेकर भी कई प्रतिबंध लागू किए गए हैं। वॉर्टेक्सा के अनुसार, अगस्त में रूस को पेट्रोल सप्लाई करने वाले प्रमुख देशों में भारत, तुर्किये और मोरक्को शामिल रहे।
रूस ने पेट्रोल और डीजल निर्यात पर बढ़ाए प्रतिबंध
रूस ने जुलाई में पेट्रोल के निर्यात पर लागू पूर्ण प्रतिबंध को उत्पादकों और गैर-उत्पादकों दोनों के लिए जनवरी 2027 के अंत तक बढ़ा दिया था। वहीं डीजल के निर्यात पर लागू प्रतिबंध को भी 1 सितंबर 2026 तक बढ़ाया गया है।
वॉर्टेक्सा के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में रूस के पेट्रोल आयात का करीब 55 प्रतिशत हिस्सा, लगभग 2.6 लाख टन, ऐसे कार्गो का था जिसे प्रतिबंधित जहाजों के जरिए पहुंचाया गया। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि अगस्त में भारत से रूस पहुंचने वाले पेट्रोल के सभी कार्गो प्रतिबंधित बेड़े के जहाजों पर भेजे गए और भूमध्यसागर में Ship-to-Ship (STS) Transfer के जरिए रूस पहुंचे।
रूस के डीजल निर्यात पर भी पड़ा असर
रूस का डीजल निर्यात भी युद्ध और रिफाइनरी हमलों से प्रभावित हुआ है। वॉर्टेक्सा के अनुसार, 25 अगस्त तक अगस्त महीने में रूस का समुद्री डीजल और गैसऑयल निर्यात करीब 1.5 लाख बैरल प्रतिदिन रहा। यह आंकड़ा पिछले साल अगस्त के करीब 6.10 लाख बैरल प्रतिदिन के मुकाबले काफी कम है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह पांच साल के औसत स्तर से करीब 81 प्रतिशत नीचे है।
रूसी रिफाइनरियों पर जुलाई-अगस्त में 32 हमले
रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई और अगस्त के दौरान रूसी रिफाइनरियों को करीब 32 बार निशाना बनाया गया। लगातार हो रहे ड्रोन हमलों ने रूस की तेल शोधन क्षमता पर दबाव बढ़ाया है। यही वजह है कि दुनिया के प्रमुख कच्चे तेल निर्यातकों में शामिल रूस को अब पेट्रोल जैसे रिफाइंड ईंधन के लिए दूसरे देशों पर निर्भर होना पड़ रहा है।
भारत के लिए क्या मायने रखता है?
रूस को पेट्रोल की आपूर्ति में भारत की बढ़ती भूमिका वैश्विक ऊर्जा व्यापार में बदलते समीकरण को दिखाती है। भारत रूसी कच्चे तेल का बड़ा खरीदार है और उसकी रिफाइनरियां इस कच्चे तेल को पेट्रोल, डीजल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों में बदलती हैं।
हालांकि, प्रतिबंधित जहाजों और समुद्र में STS ट्रांसफर से जुड़े दावों के कारण इस कारोबार पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर बनी हुई है।
कुल मिलाकर, रूस-यूक्रेन युद्ध ने जहां रूस की घरेलू ईंधन व्यवस्था को प्रभावित किया है, वहीं भारत की रिफाइनिंग क्षमता को रूस की पेट्रोल जरूरत पूरी करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का मौका मिला है।









