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झारखंड में 15 अक्टूबर तक बालू खनन पर रोक, निर्माण कार्यों पर पड़ सकता है असर, बढ़ सकते हैं दाम

By Riya Kumari

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झारखंड में 15 अक्टूबर तक बालू खनन पर रोक, निर्माण कार्यों पर पड़ सकता है असर, बढ़ सकते हैं दाम

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सोशल संवाद / रांची : झारखंड में बालू कारोबार, निर्माण उद्योग और आम उपभोक्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देशों के तहत राज्य में 10 जून से 15 अक्टूबर 2026 तक बालू खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लागू कर दिया गया है। मानसून सीजन के दौरान पर्यावरण संरक्षण और नदियों के प्राकृतिक प्रवाह को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से हर वर्ष यह रोक लगाई जाती है।

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एनजीटी के निर्देश के बाद राज्य की विभिन्न नदियों से बालू के उत्खनन पर रोक प्रभावी हो गई है। इसके चलते आने वाले दिनों में बाजार में बालू की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है, जिससे इसकी कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है।

बालू की कीमतों में हो सकता है इजाफा

विशेषज्ञों का मानना है कि खनन बंद होने के बाद मांग और आपूर्ति के बीच अंतर बढ़ सकता है। ऐसे में निर्माण कार्यों के लिए आवश्यक बालू महंगी हो सकती है। इसका सीधा असर भवन निर्माण, सड़क निर्माण और अन्य विकास परियोजनाओं पर पड़ने की संभावना है।

निर्माण क्षेत्र पर पड़ेगा प्रभाव

बालू खनन पर रोक लगने से कई निर्माण कार्य प्रभावित हो सकते हैं। खासकर निजी मकान निर्माण, सरकारी परियोजनाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कार्यों की लागत बढ़ने की आशंका है।

संभावित प्रभाव:

  • भवन निर्माण की लागत में बढ़ोतरी हो सकती है।
  • बालू की कमी से कई परियोजनाओं की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।
  • ठेकेदारों और आम उपभोक्ताओं को अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।
  • निर्माण सामग्री की आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो सकती है।

पर्यावरण संरक्षण के लिए जरूरी है प्रतिबंध

मानसून के दौरान नदियों में जलस्तर बढ़ जाता है। इस अवधि में बालू खनन से नदी तंत्र, जल प्रवाह और जैव विविधता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए एनजीटी हर वर्ष मानसून अवधि में बालू खनन पर अस्थायी रोक लगाता है।

15 अक्टूबर के बाद शुरू होगा खनन

सरकारी नियमों के अनुसार 15 अक्टूबर के बाद निर्धारित पर्यावरणीय मानकों और शर्तों का पालन करते हुए बालू खनन की गतिविधियां दोबारा शुरू की जाएंगी। तब तक निर्माण क्षेत्र से जुड़े लोगों को उपलब्ध स्टॉक और वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर निर्भर रहना पड़ सकता है।

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