सोशल संवाद/डेस्क: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। एक तरफ जेनेवा में परमाणु समझौते को लेकर बातचीत जारी है, तो दूसरी ओर जमीनी स्तर पर सैन्य तैयारियां तेज हो गई हैं। ताजा Satellite तस्वीरों से संकेत मिल रहे हैं कि ईरान अपने संवेदनशील परमाणु और सैन्य ठिकानों को संभावित हमलों से बचाने के लिए उन्हें और अधिक सुरक्षित बना रहा है।
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Institute for Science and International Security (ISIS) द्वारा जारी हाई-रिजोल्यूशन तस्वीरों में कई स्थलों पर भारी कंक्रीट संरचनाएं और मिट्टी की मोटी परतें नजर आई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन ठिकानों को मजबूत बंकर के रूप में विकसित किया जा रहा है ताकि हवाई या मिसाइल हमलों का असर कम किया जा सके। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, एक नए स्थल पर कंक्रीट की ढाल बनाकर उसे पूरी तरह ढक दिया गया है।
Parchin Military Complex में मजबूत संरचना तैयार कर उसे ऊपर से मिट्टी से छिपाया गया है। Isfahan Nuclear Technology Center में सुरंगों के प्रवेश मार्गों को भरकर सुरक्षा बढ़ाई गई है। Natanz Nuclear Facility में पहाड़ी सुरंगों को और मजबूत किया जा रहा है, जबकि Shiraz Missile Base पर पहले हुए हमलों के बाद मरम्मत और पुनर्सक्रियण का काम जारी है।
दूसरी ओर अमेरिका ने भी मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य तैनाती बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक F-22, F-35 और F-16 जैसे उन्नत लड़ाकू विमानों की अतिरिक्त तैनाती की गई है। समुद्री क्षेत्र में USS Abraham Lincoln जैसे विमानवाहक पोत पहले से मौजूद हैं, जिससे क्षेत्र में शक्ति प्रदर्शन साफ नजर आ रहा है।
तनाव के बावजूद कूटनीतिक प्रयास जारी हैं। जेनेवा में हुए अप्रत्यक्ष वार्ता दौर के बाद ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने कुछ बिंदुओं पर सैद्धांतिक सहमति की बात कही है। वहीं अमेरिका की ओर से स्पष्ट किया गया है कि यूरेनियम संवर्धन रोकना और मिसाइल कार्यक्रम पर नियंत्रण किसी भी समझौते की मुख्य शर्त होगी।
इस बीच ईरान के सुप्रीम लीडर Ali Khamenei ने कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि किसी भी हमले की स्थिति में ईरान निर्णायक जवाब देगा। ऐसे में क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।










