सोशल संवाद / डेस्क : दिल्ली के सत्य निकेतन में पीजी भवन गिरने के मामले में पूर्व आईपीएस अधिकारी और पुडुचेरी की पूर्व उपराज्यपाल किरण बेदी ने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है। उन्होंने मामले में खुद को पक्षकार बनाए जाने की मांग की है, ताकि पीजी हॉस्टल की सुरक्षा और इससे जुड़े व्यापक मुद्दों को अदालत के सामने रखा जा सके। हालांकि, केंद्र सरकार ने उनकी अर्जी का विरोध किया है।
कोर्ट ने किरण बेदी के अनुभव का किया जिक्र
मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि किरण बेदी एक अनुभवी प्रशासक रही हैं और उनके अनुभव का इस्तेमाल मामले में किया जा सकता है। अदालत ने केंद्र से कहा कि उनकी अर्जी को टकराव के नजरिए से न देखा जाए।
केंद्र की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने बेदी की अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि उनके आवेदन में मामले के कुछ पहलुओं पर पहले ही राय बना लेने का संकेत मिलता है। केंद्र ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा।
अदालत ने केंद्र, दिल्ली सरकार और एमसीडी को तीन दिन के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर को होगी।
क्या है सत्य निकेतन भवन गिरने का मामला?
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में 6 सितंबर 2026 को एक पांच मंजिला इमारत ढह गई थी। इस भवन में दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास छात्रों के लिए पीजी आवास चल रहा था। हादसे में 7 लोगों की मौत हुई, जबकि कई लोग घायल हुए। हादसे के समय भवन में मरम्मत का काम चल रहा था।
हादसे के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने 7 सितंबर को एमसीडी को उच्च स्तर पर जांच कराने का निर्देश दिया था। अदालत ने पीजी सुविधाओं, छात्रों की सुरक्षा और दिल्ली में पर्याप्त हॉस्टल सुविधाओं से जुड़े व्यापक मुद्दों पर भी चिंता जताई थी।
किरण बेदी ने अपनी अर्जी में क्या कहा?
किरण बेदी की अर्जी में पीजी हॉस्टलों के संचालन और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कई मुद्दों को उठाया गया है। उन्होंने कथित तौर पर स्थानीय राजनीतिक प्रतिनिधियों, प्रशासनिक लापरवाही और कुछ अवैध पीजी के संचालन के बीच संबंधों की जांच की जरूरत बताई है।
ये बातें उनकी अर्जी में लगाए गए आरोप और दावे हैं, जिन पर संबंधित पक्षों का जवाब और अदालत का परीक्षण अभी बाकी है।
25 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
दिल्ली हाई कोर्ट ने फिलहाल केंद्र और अन्य संबंधित पक्षों को जवाब दाखिल करने का समय दिया है। 25 सितंबर 2026 को मामले की अगली सुनवाई होगी। इसी दौरान किरण बेदी को औपचारिक रूप से पक्षकार बनाए जाने की मांग पर आगे की कार्रवाई हो सकती है।










