सोशल संवाद / डेस्क : पाकिस्तान ने संकेत दिया है कि वर्ष 2027 में इस्लामाबाद में आयोजित होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी औपचारिक निमंत्रण भेजा जाएगा। पाकिस्तान का कहना है कि यह निमंत्रण किसी विशेष देश के लिए नहीं, बल्कि संगठन की तय प्रक्रिया के तहत सभी सदस्य देशों को भेजा जाएगा।
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पाकिस्तान के इस बयान के बाद एक बार फिर भारत-पाकिस्तान संबंधों और क्षेत्रीय कूटनीति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सम्मेलन में शामिल होंगे या नहीं, इस पर अभी भारत सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
पाकिस्तान ने क्या कहा?
पाकिस्तान की ओर से शुक्रवार को कहा गया कि शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की स्थापित परंपरा के अनुसार सभी सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों और सरकार प्रमुखों को शिखर सम्मेलन का निमंत्रण भेजा जाता है। इसी प्रक्रिया के तहत भारत को भी आमंत्रित किया जाएगा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आधिकारिक निमंत्रण भेजा जाएगा।पाकिस्तान ने यह भी स्पष्ट किया कि निमंत्रण भेजना संगठन की औपचारिक प्रक्रिया का हिस्सा है और सभी सदस्य देशों के लिए समान नियम लागू होते हैं।
भारत के फैसले पर रहेंगी नजरें
पाकिस्तान के बयान के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को औपचारिक निमंत्रण मिलता है, तो क्या भारत उसे स्वीकार करेगा?विदेश नीति के जानकारों का मानना है कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में प्रधानमंत्री की भागीदारी कई कूटनीतिक और सुरक्षा पहलुओं को ध्यान में रखकर तय की जाती है। ऐसे में निमंत्रण मिलने के बाद भारत सरकार परिस्थितियों का आकलन करेगी और उसी आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
भारत-पाकिस्तान संबंधों के बीच बढ़ी चर्चा
भारत और पाकिस्तान के रिश्ते पिछले कई वर्षों से तनावपूर्ण बने हुए हैं। सीमा पार आतंकवाद, सुरक्षा और कूटनीतिक मुद्दों को लेकर दोनों देशों के बीच कई बार संबंधों में तल्खी देखने को मिली है। इसके बावजूद दोनों देश SCO जैसे बहुपक्षीय मंचों पर सदस्य के रूप में एक साथ मौजूद रहते हैं और विभिन्न बैठकों में भाग लेते हैं।
यही वजह है कि 2027 का यह सम्मेलन कूटनीतिक नजरिए से काफी अहम माना जा रहा है।
क्या है शंघाई सहयोग संगठन (SCO)?
शंघाई सहयोग संगठन (Shanghai Cooperation Organisation) दुनिया के प्रमुख क्षेत्रीय संगठनों में से एक है। इसकी स्थापना वर्ष 2001 में हुई थी। संगठन का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सुरक्षा सहयोग, आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त प्रयास, आर्थिक साझेदारी, व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देना है।भारत और पाकिस्तान दोनों वर्ष 2017 में SCO के पूर्ण सदस्य बने थे। इसके बाद से दोनों देश संगठन की विभिन्न बैठकों और शिखर सम्मेलनों में समय-समय पर भाग लेते रहे हैं।
औपचारिक निमंत्रण अभी भेजा जाना बाकी
हालांकि पाकिस्तान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी निमंत्रण भेजा जाएगा, लेकिन अभी तक आधिकारिक निमंत्रण जारी नहीं किया गया है। आने वाले समय में जब सम्मेलन की तैयारियां आगे बढ़ेंगी, तब सदस्य देशों को औपचारिक निमंत्रण भेजे जाएंगे।इसके बाद भारत सरकार यह तय करेगी कि सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल होंगे, किसी अन्य प्रतिनिधि को भेजा जाएगा या भारत किसी अन्य स्तर पर अपनी भागीदारी सुनिश्चित करेगा।
कूटनीतिक नजरिए से अहम होगा 2027 का सम्मेलन
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत और पाकिस्तान दोनों के शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी इस सम्मेलन में होती है, तो यह दक्षिण एशिया की कूटनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण अवसर साबित हो सकता है। हालांकि, किसी भी संभावित मुलाकात या द्विपक्षीय वार्ता को लेकर अभी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।फिलहाल इतना तय है कि पाकिस्तान ने SCO Summit 2027 के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निमंत्रण भेजने की पुष्टि कर दी है। अब सबकी नजरें भारत सरकार के अगले कदम और आधिकारिक रुख पर टिकी रहेंगी।









