सोशल संवाद / रांची : राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने अपनी सुरक्षा वापस करने के फैसले पर फिलहाल विस्तृत टिप्पणी करने से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि गृह विभाग को अपनी सुरक्षा क्यों लौटाई, इसकी जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं करेंगे। दो-चार दिनों में आवश्यकता के अनुसार अपने क्षेत्र की जनता को इसकी पूरी जानकारी देंगे। वित्त मंत्री ने कहा कि यह विषय उनके, वित्त विभाग और गृह विभाग के बीच का है। इस मामले में उनकी मुख्यमंत्री से कोई बातचीत नहीं हुई है।
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उन्होंने कहा कि गृह विभाग और डीजीपी को राज्य के जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा व्यवस्था की नए सिरे से समीक्षा करनी चाहिए। उनके अनुसार, उग्रवाद प्रभावित और संवेदनशील क्षेत्रों के जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीरता से विचार होना चाहिए कि क्या उनकी सुरक्षा अन्य क्षेत्रों के जनप्रतिनिधियों के समान होनी चाहिए या अलग व्यवस्था की जरूरत है।
राधाकृष्ण ने कहा कि जब जमशेदपुर में पुलिस वाहन से खींचकर हत्या की जा सकती है, तो केवल सुरक्षाकर्मियों की तैनाती भर से सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाती। इस पूरे घटनाक्रम के बीच 29 जून को वित्त मंत्री द्वारा डीजीपी को लिखा पत्र भी चर्चा में है। पत्र में मंत्री ने उल्लेख किया है कि उनकी सुरक्षा के लिए 16 पुलिसकर्मी थे, लेकिन उनके आवागमन के लिए केवल तीन सरकारी वाहन थे। तीन वाहनों में 16 सुरक्षाकर्मियों को समायोजित करना कठिन होने के साथ-साथ सुरक्षा की दृष्टि से भी उचित नहीं था। इसी कारण उन्होंने पहले पुलिस मुख्यालय से चार वाहन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। पत्र में यह भी उल्लेख है कि इस अनुरोध पर कोई जवाब नहीं मिला।
इसी दौरान वित्त विभाग के संयुक्त सचिव द्वारा पुलिस मुख्यालय के एक पुराने निर्देश का हवाला देते हुए एक वाहन वापस करने के लिए नोटिस जारी किया गया। मंत्री ने पत्र में कहा कि उनके आप्त सचिव को जारी किया गया यह नोटिस उन्हें असहज और अपमानजनक लगा। इसके बाद उन्होंने वाहन सहित पूरी सुरक्षा व्यवस्था वापस करने का निर्णय लिया। वहीं, डीजीपी तदाशा मिश्रा ने कहा कि कैबिनेट के सभी मंत्रियों को नियमानुसार और प्रोटोकॉल के तहत समान सुरक्षा उपलब्ध कराई जाती है।










