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15 सितंबर से बंद हो सकता है दुकानदारों का UPI:RBI से री-केवाईसी की डेडलाइन बढ़ाने की मांग

By Tamishree Mukherjee

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सोशल संवाद/डेस्क : ऑनलाइन पेमेंट लेने में मदद करने वाली कंपनियों ने रिजर्व बैंक से दुकानदारों की री-केवाईसी के लिए तय 15 सितंबर की समयसीमा को आगे बढ़ाने की अपील की है। वजह यह है कि देश के लाखों छोटे-बड़े दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी वालों का वेरिफिकेशन अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। अगर RBI ने री-केवाईसी की आखिरी तारीख नहीं बढ़ाई, तो लाखों दुकानदारों का ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम बंद हो सकता है।
इससे जब आप दुकानों, ठेलों या ऑनलाइन कोई सामान खरीदेंगे, तो UPI या कार्ड से पैसे भेजने में दिक्कत आएगी और डिजिटल पेमेंट की सर्विस ठप हो सकती है।

मामले के हर पहलू को 5 सवाल-जवाब में जानिए…

सवाल 1: मामला क्या है और पेमेंट एग्रीगेटर्स ने RBI से क्या मांग की है?
जवाब: पेटीएम-फोनपे जैसी ऑनलाइन पेमेंट कंपनियों का कहना है कि देश भर में लाखों छोटे-बड़े दुकानदारों का वेरिफिकेशन अभी बाकी है। 15 सितंबर तक की समयसीमा में काम पूरा करना एक बड़ी चुनौती है, इसलिए इसे बढ़ा दिया जाए।


सवाल 2.
अगर डेडलाइन नहीं बढ़ती है, तो इसका क्या असर होगा?
अगर RBI समय नहीं बढ़ाता है, तो दुकानों और ऑनलाइन खरीदारी के दौरान पेमेंट अटक सकती है। जिन दुकानदारों की री-केवाएसी 15 सितंबर तक पूरी नहीं हो पाएगी, उनके मर्चेंट अकाउंट अस्थायी रूप से ब्लॉक किए जा सकते हैं।


सवाल 3. कितने मर्चेंट्स पर इसका सीधा असर पड़ने की आशंका है?
जवाब: रिपोर्ट्स के मुताबिक, QR कोड का इस्तेमाल करने वाले लगभग 30% से 35% छोटे और रेहड़ी-पटरी वाले दुकानदार प्रभावित हो सकते हैं। इसके अलावा लगभग 10 लाख छोटे ऑनलाइन बिजनेसेज का भी पेमेंट सिस्टम बंद हो सकता हैं।


सवाल 4.
ऑफलाइन मर्चेंट्स के वेरिफिकेशन में क्या-क्या समस्याएं आ रही हैं?
जवाब: पेटीएम-फोनपे जैसी कंपनियों के पास छोटे शहरों और गांवों में लाखों की संख्या में साउंड बॉक्स और QR स्टेंडी लगे हुए हैं। इनमें से कई छोटे और रेहड़ी-पटरी वाले विक्रेता हैं, जिनके पास पूरे पक्के दस्तावेज नहीं हैं।
सख्त नियमों और मौके पर जाकर जांच (फिजिकल वेरिफिकेशन) करने की शर्त के कारण इन तक पहुंचना और डॉक्युमेंट्स जुटाना काफी कठिन हो रहा है।

सवाल 5. री-केवाईसी क्या है और यह क्यों जरूरी है?
जवाब: KYC का मतलब है कि ग्राहक या दुकानदार की पहचान और पते की जांच करना। री-KYC का मतलब है उसी जांच को समय-समय पर दोबारा अपडेट करना। धोखाधड़ी, फर्जीवाड़े और काले धन के लेन-देन को रोकने के लिए सरकार दुकानदारों के कागजात फिर से चेक कराती है, ताकि पेमेंट सिस्टम सुरक्षित रहे।

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