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भागवत कथा के छठे दिन राधा-कृष्ण विवाह व बकासुर-अघासुर वध प्रसंग का हुआ वर्णन

By Aditi Pandey

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sixth day of the Bhagwat Katha भागवत

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सोशल संवाद/डेस्क: भागवत कथा के छठे दिन श्रद्धालुओं को राधा-कृष्ण विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन सुनाया गया। कथा के दौरान गोकुल और नंद गांव के जीवन, आपसी प्रेम और सामाजिक समरसता पर प्रकाश डाला गया। कथावाचक ने बताया कि नंद बाबा के छोटे भाई का नाम घनानंद था और कृष्ण के गोकुल त्याग कर वृंदावन जाने के प्रसंग का भी विस्तार से वर्णन किया गया।

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कथा में वृंदावन के महत्व को समझाते हुए बताया गया कि ‘वृंदा’ का अर्थ तुलसी, प्रेम, भक्ति और विश्वास है। यदि ये गुण जीवन में सदैव बने रहें तो व्यक्ति कभी असफल नहीं होता। बछड़ों को इंद्रियों का प्रतीक बताते हुए समझाया गया कि जैसे बछड़े चंचल होते हैं, वैसे ही मनुष्य की इंद्रियां भी होती हैं, जिन्हें कृष्ण के सान्निध्य से संयम में रखा जा सकता है।

कथा में बकासुर और अघासुर वध प्रसंग का भी जीवंत वर्णन किया गया। बताया गया कि बकासुर बगुले का रूप धारण कर और अघासुर विशाल अजगर का रूप लेकर कृष्ण और ग्वालबालों को मारने आए थे। श्रीकृष्ण ने अपना विराट रूप धारण कर ग्वालबालों की रक्षा की और अघासुर का वध कर सभी का जीवन बचाया। इस प्रसंग के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि जीवन में छिपे हुए संकटों से हमेशा सतर्क रहना आवश्यक है।

कार्यक्रम के अंत में भगवान को भोग अर्पित किया गया और प्रसाद वितरण किया गया। कथा कार्यक्रम में जमशेदपुर पूर्वी की विधायक पूर्णिमा साहू, मंडल अध्यक्ष कुमार अभिषेक, संतोष ठाकुर, निर्मल सिंह, सन्नी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम को सफल बनाने में शत्रुघ्न प्रसाद, संजय गुप्ता, रूपा गुप्ता, स्वाति गुप्ता, अमर भूषण, देवाशीष झा सहित अन्य श्रद्धालुओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

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