सोशल संवाद / डेस्क : केंद्र सरकार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आज संथाल समाज के श्रद्धा स्थल रजरप्पा जाहेरगढ़ में विशेष धार्मिक अनुष्ठान एवं प्रार्थना आयोजित की गई। इस दौरान मरांग बुरु से “विकसित भारत” के संकल्प को पूर्ण करने की कामना की गई।
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कार्यक्रम में क्षेत्र के लोगों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना कर देश की प्रगति, शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना की।

आदिवासी वीरों के संघर्ष को किया गया याद
इस अवसर पर समाज के ऐतिहासिक योगदान को याद करते हुए कहा गया कि आदिवासी समाज ने सदियों से जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए संघर्ष किया है।
कार्यक्रम में बाबा तिलका मांझी, वीर सिदो-कान्हू, धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा, वीर पोटो हो, वीर टाना भगत, वीर तेलंगा खड़िया सहित कई महान जननायकों के संघर्षों को स्मरण किया गया।
संस्कृति और परंपरा के संरक्षण पर जोर
आयोजकों ने कहा कि आदिवासी समाज की रूढ़िजन्य परंपराओं, भाषा और संस्कृति के संरक्षण के लिए एक मजबूत “सुरक्षा कवच” की आवश्यकता है, ताकि आने वाली पीढ़ियों तक उनकी पहचान सुरक्षित रह सके।

केंद्र सरकार की योजनाओं का उल्लेख
कार्यक्रम में कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आदिवासी समाज के विकास के लिए कई योजनाएं शुरू की गई हैं, जिनमें शामिल हैं:
- प्रधानमंत्री जनमन योजना
- पीएम वन धन योजना
- धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान
- एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों का विस्तार
साथ ही “जनजातीय गौरव दिवस” के रूप में भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को राष्ट्रीय स्तर पर मनाने के निर्णय की सराहना की गई।

PVTG और वन अधिकार पर चर्चा
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTG) के लिए आवास, बिजली, पानी, सड़क और स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था की जा रही है।
इसके अलावा वन अधिकार अधिनियम (FRA) के तहत पट्टों के वितरण को भी महत्वपूर्ण कदम बताया गया।
“विकसित भारत 2047” में आदिवासी भागीदारी पर जोर
वक्ताओं ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विविधता और पर्यावरण संरक्षण में आदिवासी समाज की महत्वपूर्ण भूमिका है। “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आदिवासी समुदाय की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
उन्होंने युवाओं से शिक्षा और विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ने का आह्वान किया।
पारंपरिक संदेश के साथ प्रार्थना
कार्यक्रम के अंत में मरांग बुरु से प्रार्थना की गई कि देश के विकास में आदिवासी समाज की सशक्त भागीदारी सुनिश्चित हो और उनकी संस्कृति, परंपरा एवं अधिकारों का संरक्षण बना रहे।
साथ ही यह भी कहा गया कि सीएनटी-एसपीटी एक्ट और विल्किंसन रूल्स जैसे कानूनों का प्रभावी पालन जरूरी है, ताकि पारंपरिक अधिकार सुरक्षित रह सकें।
रजरप्पा जाहेरगढ़ में आयोजित यह कार्यक्रम आदिवासी समाज की आस्था, संस्कृति और विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस अवसर पर “विकसित भारत 2047” के संकल्प के साथ आदिवासी समाज की भूमिका को और मजबूत करने का संदेश दिया गया।










