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तीखा-मसालेदार खाना बढ़ा सकता है गंभीर बीमारियों का खतरा, डॉक्टरों की चेतावनी

By Muskan Thakur

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सोशल संवाद/डेस्क : भारतीय भोजन अपनी खुशबू, स्वाद और मसालों के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। मिर्च, हल्दी, गरम मसाला, लाल मिर्च पाउडर और अन्य तेज मसाले भारतीय रसोई का अहम हिस्सा हैं। हालांकि, स्वाद को बढ़ाने वाले यही मसाले अगर जरूरत से ज्यादा मात्रा में और लंबे समय तक खाए जाएं, तो सेहत के लिए नुकसानदायक भी साबित हो सकते हैं। विशेषज्ञों और डॉक्टरों का कहना है कि अत्यधिक तीखा और मसालेदार भोजन पेट से जुड़ी कई गंभीर बीमारियों की वजह बन सकता है।

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डॉक्टरों के अनुसार, जरूरत से ज्यादा मसालेदार खाना पेट की अंदरूनी परत यानी म्यूकोसा को नुकसान पहुंचा सकता है। इससे गैस्ट्राइटिस, एसिडिटी, अल्सर और लंबे समय में पेट के कैंसर जैसी गंभीर समस्या का खतरा भी बढ़ सकता है। खासतौर पर जो लोग रोजाना बहुत तीखा, तला-भुना और चटपटा खाना खाते हैं, उनमें यह जोखिम अधिक देखा गया है।

डॉक्टर बताते हैं कि तीखे मसालों में मौजूद कैप्साइसिन (Capsaicin) जब सीमित मात्रा में लिया जाए तो पाचन के लिए फायदेमंद हो सकता है, लेकिन अधिक मात्रा में यही तत्व पेट में जलन, सूजन और घाव पैदा कर सकता है। लगातार ऐसा भोजन करने से पेट की कोशिकाओं पर दबाव पड़ता है, जिससे सूजन बनी रहती है और यही सूजन आगे चलकर गंभीर बीमारियों का रूप ले सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, सिर्फ मसाले ही नहीं बल्कि तीखे खाने के साथ ली जाने वाली कुछ आदतें भी खतरा बढ़ाती हैं। जैसे खाली पेट तीखा खाना, देर रात मसालेदार भोजन करना, बहुत गर्म चाय या कॉफी के साथ मसालेदार स्नैक्स लेना और बार-बार फास्ट फूड या स्ट्रीट फूड का सेवन करना। ये सभी आदतें मिलकर पेट और आंतों को कमजोर कर देती हैं।

डॉक्टरों का कहना है कि जिन लोगों को पहले से एसिडिटी, गैस, सीने में जलन, पेट दर्द या अपच की शिकायत रहती है, उन्हें खासतौर पर मसालेदार खाने से परहेज करना चाहिए। अगर ऐसे लक्षणों को लंबे समय तक नजरअंदाज किया जाए, तो यह समस्या गंभीर रूप ले सकती है। कई मामलों में देखा गया है कि लगातार जलन और सूजन के कारण पेट की कोशिकाओं में असामान्य बदलाव होने लगते हैं।

हालांकि, विशेषज्ञ यह भी साफ करते हैं कि मसालों को पूरी तरह से छोड़ना जरूरी नहीं है। सही मात्रा और संतुलन सबसे अहम है। हल्दी, धनिया, जीरा जैसे मसाले सीमित मात्रा में सेहत के लिए फायदेमंद भी होते हैं। समस्या तब शुरू होती है, जब लाल मिर्च, तीखे सॉस और ज्यादा ऑयली मसालों का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि रोजाना के खाने में सादा, हल्का और पोषण से भरपूर भोजन शामिल करना चाहिए। हरी सब्जियां, फल, दालें, साबुत अनाज और पर्याप्त मात्रा में पानी पेट को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। इसके साथ ही खाना धीरे-धीरे और सही समय पर खाने की आदत भी पाचन तंत्र को मजबूत बनाती है।

अगर किसी व्यक्ति को लंबे समय से पेट में जलन, दर्द, उल्टी, वजन कम होना या भूख न लगने जैसी समस्याएं हो रही हों, तो बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय पर जांच और सही खान-पान से गंभीर बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

निष्कर्ष यही है कि स्वाद के चक्कर में सेहत से समझौता करना सही नहीं है। तीखा-मसालेदार खाना कभी-कभार ठीक है, लेकिन अगर यही रोजमर्रा की आदत बन जाए, तो यह शरीर के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। संतुलित आहार और संयम ही स्वस्थ जीवन की सबसे बड़ी कुंजी है। AI के क्षेत्र में भारत का कमाल! टॉप-3 देशों में हुआ शामिल – सिंगापुर,

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